वाशिंगटन, प्रेट्र। हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों के पक्ष में एक कानून बनाने के बाद अमेरिकी संसद ने मंगलवार को उइगर मानवाधिकार नीति विधेयक को मंजूरी दी। संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में एक के मुकाबले 407 मतों से पारित इस विधेयक में अमेरिका द्वारा चीन में नजरबंद किए गए दस लाख उइगर मुस्लिमों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों तक संसाधनों को पहुंचाने का प्रस्ताव किया गया है। बिल सीनेट से पहले ही पास हो चुका है। इस बिल को मंजूरी दिए जाने के खिलाफ चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

रिपब्लिकन नेता केविन मैकार्थी ने कहा, उइगरों का उत्पीड़न मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है। इस बिल को पारित करके संसद ने दिखा दिया कि अमेरिका उइगरों के उत्पीड़न से मुंह नहीं मोड़ेगा। इससे पहले हमने हांगकांग लोकतंत्र एवं मानवाधिकार कानून बनाकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को मजबूत संदेश दिया था। हमारा मानना है कि लोगों के अधिकारों को कुचलकर सत्ता को कायम नहीं रखा जा सकता। सीनेट की विदेश मामलों से संबंधित समिति के सदस्य मार्को रूबियो और बॉब मेंडेज ने बताया कि यह विधेयक शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में चीन सरकार द्वारा किए जा रहे मानव अधिकारों के हनन का मुकाबला करेगा।

 

बिल अमेरिका के विभिन्न सरकारी विभागों को निर्देश देता है कि वह उइगरों के खिलाफ चीन द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न पर रिपोर्ट तैयार करें। बिल में शिनजियांग प्रांत में चल रहे हिरासत शिविरों के लिए जिम्मेदार नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई है। जिन नेताओं पर प्रतिबंध की सिफारिश की गई है, उनमें शिनजियांग कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव चेन कुआंग का नाम भी है। वह कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं।

आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप का एक और उदाहरण: चीन

चीन ने कहा है कि अमेरिका का यह कदम हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का एक और उदाहरण है। चीन की संसद की विदेश मामलों की समिति का कहना है कि यह बिल पारित करके अमेरिका ने शिनजियांग प्रांत में आतंकवाद का मुकाबला करने और मानवाधिकारों की रक्षा के अपने प्रयासों के प्रति आंखें मूंद ली हैं। राजधानी बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनइंग ने कहा कि अमेरिकी संसद द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से असत्य हैं। अमेरिका को हर गलत आरोप और प्रतिक्रिया के लिए कीमत चुकानी पड़ेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी संसद के इस कदम से दोनों देशों के व्यापार समझौते पर फर्क पड़ेगा, तो उन्होंने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया। लेकिन यह जरूर कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

Posted By: Tilak Raj

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