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अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर, कर्नाटक से है गहरा पारिवारिक रिश्ता

Published: Thu, 05 Nov 2026 10:14 PM (IST)

अब्दुल अल-सैयद मिशिगन से अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बने, जिन्होंने रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराया।

अल-सैयद का कर्नाटक से है पारिवारिक रिश्ता

अल-सैयद का कर्नाटक से है पारिवारिक रिश्ता

HighLights

  1. अब्दुल अल-सैयद मिशिगन से अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर निर्वाचित।

  2. उनकी पत्नी सारा जुकाकू का भटकल, कर्नाटक से पारिवारिक संबंध।

  3. अल-सैयद ने रिपब्लिकन माइक रोजर्स को 52% वोटों से हराया।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका के मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर निर्वाचित हुए हैं।

उनकी इस जीत के साथ भारत के कर्नाटक राज्य के तटीय शहर भटकल का भी अमेरिका की राजनीति से खास जुड़ाव सामने आया है। दरअसल, अल-सैयद की पत्नी डा. सारा जुकाकू का पारिवारिक संबंध कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल से है।

42 वर्षीय अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व सांसद माइक रोजर्स को करीब 52 प्रतिशत वोट हासिल कर हराया। वह सेवानिवृत्त हो रहे डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे। सारा जुकाकू का जन्म और पालन-पोषण मिशिगन में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर हुआ।

उनके पिता डा. तैयब जुकाकू भटकल के रहने वाले हैं और पेशे से किडनी रोग विशेषज्ञ हैं। उनका परिवार नवायत मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है। सारा के दादा जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू मैसूर राज्य की तत्कालीन सरकार में उप वित्त मंत्री रह चुके हैं। सारा ने मिशिगन विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र और नियर ईस्टर्न स्टडीज की पढ़ाई की।

इसके बाद आक्सफोर्ड से मास्टर डिग्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल की डिग्री हासिल की। एल-सैयद और सारा की मुलाकात मिशिगन विश्वविद्यालय में मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन के माध्यम से हुई थी। दोनों ने 2006 में शादी की। उनकी दो बेटियां हैं।

अल-सैयद ने अपनी जीत के बाद कहा, ‘मैं अमेरिका से प्यार करता हूं।’ उन्होंने कहा कि विरोधियों ने नफरत का रास्ता चुना, जबकि मिशिगन की जनता ने उम्मीद को चुना। अल-सैयद का जन्म मिशिगन में मिस्र से आए प्रवासी पिता के परिवार में हुआ। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से पढ़ाई की, आक्सफोर्ड में रोड्स स्कालर रहे और कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले वह डेट्रायट के स्वास्थ्य निदेशक और वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख रहे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, स्कूली बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने और मेडिकल कर्ज माफ कराने जैसी योजनाओं पर काम किया। उनकी जीत को भारतीय-अमेरिकी और दक्षिण एशियाई समुदाय के बीच भी खास उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

सोर्स- न्यूज एजेंसी IANS के इनपुट के अनुसार

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