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डेमोक्रेट्स की जीत से ट्रंप के लिए खड़ी होंगी कई मुश्किलें, संसद में कमजोर होगी पकड़

Published: Thu, 05 Nov 2026 05:30 AM (IST)

प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को विभिन्न संसदीय समितियों का नियंत्रण मिल जाएगा। इसके जरिए वे ट्रंप प्रशासन ...और पढ़ें

डेमोक्रेट्स की जीत से ट्रंप के लिए खड़ी होंगी कई मुश्किलें (फोटो- रॉयटर)

डेमोक्रेट्स की जीत से ट्रंप के लिए खड़ी होंगी कई मुश्किलें (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. संसद में कमजोर पड़ सकती है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पकड़

  2. विपक्ष के कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है सामना

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रतिनिधि सभा (हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के साथ सीनेट में भी डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन बदल गया है।

अब ट्रंप को अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है। डेमोक्रेट्स न केवल उनके विधायी प्रस्तावों को रोक सकते हैं, बल्कि सरकारी खर्च पर नियंत्रण, प्रशासन की जांच और महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। ऐसे में ट्रंप अपने कार्यकाल के शेष दो वर्षों में कमजोर राष्ट्रपति साबित हो सकते हैं।

मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप ने मतदाताओं से इस चुनाव को अपने राष्ट्रपति कार्यकाल पर जनमत संग्रह की तरह देखने की अपील की थी। मतदाताओं ने उनके कामकाज पर अपना फैसला सुनाते हुए रिपब्लिकन पार्टी को झटका दिया। महंगाई, डीजल की बढ़ती कीमतें और ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभावों को रिपब्लिकन की हार की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

विधायी एजेंडे पर लग सकता है रोक

कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से ट्रंप के लिए टैक्स, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी खर्च और अन्य घरेलू नीतियों से जुड़े विधेयकों को पारित कराना मुश्किल होगा। हालांकि, सीनेट में फिलिबस्टर नियम उनके लिए भी चुनौती बना रहेगा।

इस नियम के तहत सामान्य तौर पर किसी विधेयक पर आगे बढ़ने के लिए 100 में से 60 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में डेमोक्रेट्स को कुछ मामलों में रिपब्लिकन सांसदों का सहयोग लेना पड़ सकता है।

इसके अलावा ट्रंप के पास राष्ट्रपति के तौर पर किसी विधेयक को वीटो करने का अधिकार भी रहेगा। कांग्रेस को राष्ट्रपति के वीटो को निरस्त करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो डेमोक्रेट्स के लिए आसान नहीं होगा।

ट्रंप परिवार के कारोबार की हो सकती है जांच

प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को विभिन्न संसदीय समितियों का नियंत्रण मिल जाएगा। इसके जरिए वे ट्रंप प्रशासन से जुड़े मामलों की जांच कर सकते हैं और दस्तावेजों तथा गवाहों को पेश होने के लिए समन जारी कर सकते हैं।

ट्रंप परिवार के शेयर कारोबार, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े निवेश, व्हाइट हाउस के प्रस्तावित बालरूम प्रोजेक्ट की फंडिंग और जेफरी एपस्टीन से संबंधित दस्तावेजों को संभालने के प्रशासन के तरीके की जांच की संभावना है। ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के कारोबारी हित भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

महाभियोग की प्रक्रिया हो सकती है शुरू

डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का विकल्प भी अपना सकते हैं। प्रतिनिधि सभा में साधारण बहुमत से महाभियोग की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

हालांकि, राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। इसलिए केवल प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करना ट्रंप को पद से हटाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इससे पहले ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं, लेकिन सीनेट में दोषी साबित नहीं हुए थे।

नियुक्तियों और बजट पर भी बढ़ेगा टकराव

सीनेट में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से ट्रंप के वरिष्ठ अधिकारियों, राजदूतों और संघीय न्यायाधीशों की नियुक्तियों पर भी अड़चन आ सकती है। सीनेट इन नियुक्तियों को मंजूरी देती है, इसलिए डेमोक्रेट्स ट्रंप के पसंदीदा उम्मीदवारों की नियुक्ति में देरी कर सकते हैं या उन्हें खारिज कर सकते हैं।

वहीं, अमेरिकी संविधान के तहत सरकारी खर्च पर कांग्रेस का नियंत्रण होता है। ऐसे में डेमोक्रेट्स ट्रंप की प्राथमिकताओं के लिए फंडिंग रोक सकते हैं। इससे बजट को लेकर लंबी खींचतान और सरकारी कामकाज ठप होने यानी शटडाउन की स्थिति पैदा हो सकती है।

राष्ट्रपति के पास फिर भी रहेंगे कई अधिकार

कांग्रेस में बहुमत खोने के बावजूद ट्रंप के राष्ट्रपति पद के कार्यकारी अधिकार खत्म नहीं होंगे। वे कार्यकारी आदेशों के जरिए टैरिफ, आव्रजन और विदेश नीति से जुड़े कई फैसले ले सकते हैं।

सैन्य कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संघीय कर्मचारियों से जुड़े मामलों में भी उनके पास महत्वपूर्ण अधिकार बने रहेंगे। हालांकि, संसद में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति ट्रंप के लिए अपनी मर्जी से फैसले लागू करना कठिन बना देगी। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष के साथ टकराव के बजाय सहयोग का रास्ता तलाशने और जनता की आर्थिक अपेक्षाओं को पूरा करने की होगी।

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