वाशिंगटन, एपी। विश्वभर में साइबर हमले और हैकिंग के मामलों में अमेरिका के न्याय विभाग ने छह रूसी खुफिया अधिकारियों को आरोपित किया है। ये आरोप उसी खुफिया यूनिट पर लगाया गया है, जिसे 2016 के अमेरिकी चुनाव में दखलंदाजी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

वहीं रूस ने मंगलवार को यूएस की तरफ से लगाए गए इन आरोपों को खारिज कर दिया है। रूस के RIA न्यूज ने वाशिंगटन में रूसी एंबेसी के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि मॉस्को ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि इस तरह की सूचनाओं का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

 

ये अधिकारी रूस की जीआरयू खुफिया एजेंसी में काम करते हैं। इन पर अरबों डॉलर के नुकसान और पेंसिलवानिया में स्वास्थ्य नेटवर्क के साथ ही फ्रांस के चुनाव में भी व्यवधान पैदा करने का आरोप है।

ज्ञात हो कि 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से एक सप्ताह पहले ही इस खुफिया ग्रुप ने डेमोक्रेटिक ईमेल इंटरनेट पर जारी कर दिए थे। उस समय यह साइबर हमला सबसे ज्यादा घातक और नुकसानदायक माना गया था। इसने याहू को भी अपना निशाना बनाया था। रूस के इन हैकरों ने ही 2018 में दक्षिणी कोरिया में हुए विंटर ओलंपिक में भी सॉफ्टवेयर पर अटैक करते हुए डाटा को नुकसान पहुंचाया था। एफबीआइ के उप-निदेशक डेविड बॉडिच ने कहा है कि चीन को साइबर हमलों के मामले में अब अपनी नीयत साफ रखनी होगी।

गौरतलब है कि अमेरिका के न्याय विभाग ने रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू के सात अधिकारियों को काली सूची में डाल दिया था। इस लिस्ट में आने के बाद इनका अमेरिका और उसके मित्र देशों से किसी तरह का संपर्क नहीं रह पाएगा और न ही वे इन देशों में या उनकी एयरलाइंस में यात्रा कर पाएंगे। यह कार्रवाई नीदरलैंड्स में हुए साइबर हमले के सिलसिले में की गई थी।

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