पुरुलिया के नन्हे अर्पण ने कुछ ही सेकेंड में सुनाए सातों दिन और 12 महीने, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम
पुरुलिया के ढाई वर्षीय अर्पण महतो ने अपनी असाधारण याददाश्त से 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज कराया है। ...और पढ़ें

मानवबाजार-2 प्रखंड के बड़ा कदम गांव निवासी अर्पण का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है।
HighLights
पशु-पक्षी, फल-सब्जी, मानव अंगों के नाम फर्राटे से बताते हैं।
तीन सेकंड में सात दिन, नौ सेकंड में बारह महीने सुनाए।
संसू, पुरुलिया। उम्र महज दो साल आठ महीने, लेकिन याददाश्त ऐसी कि बड़े-बड़े भी दांतों तले उंगली दबा लें। पशु-पक्षियों, फल-सब्जियों से लेकर मानव शरीर के अंगों तक के नाम फर्राटे से बताने वाले पुरुलिया के नन्हे अर्पण महतो ने अपनी असाधारण प्रतिभा से इतिहास रच दिया है।
मानवबाजार-2 प्रखंड के बड़ा कदम गांव निवासी अर्पण का नाम 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' (IBR Achiever) में दर्ज हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे पुरुलिया जिले में खुशी की लहर है।
खेल-खेल में सीखी असाधारण बातें
28 जनवरी 2024 को जन्मे अर्पण ने बेहद कम उम्र में याददाश्त और सीखने की अद्भुत क्षमता का परिचय दिया है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, वह अंग्रेजी और बांग्ला दोनों भाषाओं में 21 पशुओं, 15 फलों, आठ सब्जियों और 15 पक्षियों के नाम आसानी से बता सकता है।
इसके अलावा, उसे मानव शरीर के 23 अंगों, सप्ताह के सात दिनों और वर्ष के 12 महीनों के नाम भी कंठस्थ हैं। उसकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 31 बांग्ला और तीन अंग्रेजी कविताएं भी बिना रुके सुना सकता है।
कड़े मानकों को पार कर हासिल किया मुकाम
इस प्रतिष्ठित रिकॉर्ड में जगह बनाने के लिए अर्पण को कई चरणों की कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। उनके पिता सतीश चंद्र महतो ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की वेबसाइट पर आवेदन कर जरूरी दस्तावेज जमा किए थे।
इसके बाद संस्था ने अर्पण की प्रतिभा का प्रमाण देने के लिए एक वीडियो मांगा। वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान कड़े नियम थे-आसपास कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं होना चाहिए और न ही कोई जवाब बताने में मदद कर सकता था। वीडियो में केवल पिता के सवाल और अर्पण के स्पष्ट जवाब होने चाहिए थे।
तीन सेकेंड में सातों दिन और नौ सेकेंड में 12 महीने सुनाए
वीडियो भेजने के बाद संस्था की ओर से दो विशेष टास्क दिए गए। अर्पण को चार सेकेंड में सप्ताह के सात दिन और 10 सेकेंड में वर्ष के सभी 12 महीने सुनाने थे।
पिता को पहले यह चुनौती कठिन लगी, लेकिन नन्हे अर्पण ने सबको हैरान करते हुए महज तीन सेकेंड में सप्ताह के सातों दिन और नौ सेकेंड में जनवरी से दिसंबर तक के सभी नाम सुना दिए। संस्था ने 3 अक्टूबर 2026 को इस उपलब्धि को आधिकारिक मान्यता दी।
पिता सतीश चंद्र महतो के अनुसार, अर्पण को बचपन से ही नई चीजें सीखने में गहरी रुचि है। वह खेल-खेल में ही कई विषय सीख लेता है और एक बार बताई गई बात को लंबे समय तक याद रखता है।
महज ढाई साल की उम्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले अर्पण ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।