बंगाल में क्यों घट रही नीलकंठ पक्षी की संख्या? 10 साल में हो गई आधी
बंगाल में नीलकंठ पक्षी की संख्या एक दशक में 50% घट गई है, जिससे दुर्गापूजा की परंपराएं भी प्रभावित हो रही हैं।

बंगाल में घटी नीलकंठ पक्षी की संख्या (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
बंगाल में नीलकंठ पक्षी की संख्या एक दशक में आधी हुई।
कीटनाशकों, शहरीकरण और मोबाइल टावर विकिरण से आबादी घटी।
दुर्गापूजा की विजयादशमी परंपराओं पर भी इसका असर पड़ा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दशहरे के दिन देवी दुर्गा के कैलाश लौटने का संदेश महादेव तक पहुंचाने वाले नीलकंठ पक्षी की संख्या बंगाल में पिछले एक दशक में 50 प्रतिशत तक घट गई है। इसका असर दुर्गापूजा की उन परंपराओं पर भी पड़ा है, जिनमें विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी को उड़ाया जाता था।
पक्षियों पर काम करने वाले विशेषज्ञों और फोटोग्राफरों के अनुसार, नीलकंठ की संख्या घटने के पीछे कई कारण हैं। खेतों में कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से कीट-पतंगों की संख्या घट रही है। ये ही मुख्य रूप से नीलकंठ का भोजन हैं।
दूसरी ओर, शहरीकरण के कारण बड़े पेड़ों की कटाई से उसके प्राकृतिक आवास भी सिकुड़ रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञों ने मोबाइल टावरों से निकलने वाले विद्युत चुंबकीय विकिरण के संभावित प्रभावों पर भी चिंता जताई है।
बंगाल में क्यों घट रही नीलकंठ पक्षी की संख्या?
पुरुलिया वन मंडल के डीएफओ अंजन गुहा ने कहा कि विभिन्न कारणों से कई पक्षियों की संख्या घट रही है। इनमें नीलकंठ भी शामिल है। अलग-अलग पर्यवेक्षणों और रिपोर्टों के आधार पर हम आवश्यक कदम उठा रहे हैं।
बर्ड फोटोग्राफर वरुण राजगढ़िया ने कहा कि 2012-13 तक पश्चिमांचल के जिलों में नीलकंठ काफी संख्या में दिखाई देते थे। इसके बाद से इनकी संख्या घटने लगी।
बंगाल में गौरैया, धनेश और मृदंग जैसे पक्षियों की संख्या में भी गिरावट हो रही हैं। पक्षियों की घटती आबादी जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
यह भी पढ़ें- बंगाल में माकपा और कांग्रेस कार्यालयों में तोड़फोड़, भाजपा ने कहा- हमलों में हमारा हाथ नहीं
