बंगाल में माकपा और कांग्रेस कार्यालयों में तोड़फोड़, भाजपा ने कहा- हमलों में हमारा हाथ नहीं
दुर्गापूजा के बाद बंगाल के राजारहाट में माकपा और कांग्रेस कार्यालयों में तोड़फोड़ का आरोप लगा है। दोनों पार्टियों ने ...और पढ़ें

दुर्गापूजा के बाद बंगाल में राजनीतिक हिंसा (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
माकपा और कांग्रेस कार्यालयों में तोड़फोड़ का आरोप।
घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया गया।
भाजपा विधायक ने आरोपों को सिरे से नकारा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दुर्गापूजा के बाद बंगाल में राजनीतिक हिंसा के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। उत्तर 24 परगना के राजारहाट के विष्णुपुर-दो नंबर पंचायत अंतर्गत बसीना मंडलपाड़ा में दशमी की रात माकपा और कांग्रेस के पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ का आरोप लगा है।
माकपा और कांग्रेस नेताओं ने इस घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, राजारहाट-न्यू टाउन के भाजपा विधायक पीयूष कनोडिया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी स्थान पर भाजपा के किसी नेता की तोड़फोड़ में संलिप्तता साबित हो गई तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
माकपा नेता सप्तर्षि देव ने आरोप लगाया कि पार्टी का संबंधित कार्यालय काफी पुराना है और पहले भी उस पर कब्जा करने की कोशिशें हुई हैं। उन्होंने तोड़फोड़ के लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी तृणमूल की राजनीतिक संस्कृति को आगे बढ़ा रही है।
हाल के दिनों में राज्य के अलग-अलग इलाकों में वामपंथी स्टालों में तोड़फोड़ और किताबें फेंके जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
कांग्रेस ने सीसीटीवी फुटेज होने का किया दावा
स्थानीय कांग्रेस नेता अब्दुल मोहित के अनुसार, पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। उन्होंने दावा किया कि मोटरसाइकिलों पर पहुंचे कई लोगों ने कार्यालय में तोड़फोड़ की और सामान क्षतिग्रस्त कर दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
दूसरी ओर, भाजपा विधायक कनोडिया ने आरोपों को राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने की कोशिश बताया। उन्होंने मार्क्सवाद की आलोचना करते हुए कहा कि बंगाल की जनता ने बदलाव किया है और अब राज्य स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलेगा, कार्ल मार्क्स के विचारों पर नहीं। हालांकि, तोड़फोड़ की घटना में किसकी भूमिका थी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
