कोलकाता, जागरण संवाददाता। दुर्गा पूजा की समाप्ति के साथ ही बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस जनसंपर्क अभियान ‘दीदी के बोलो’ का दूसरा चरण शुरू करने जा रही है। इस बार बारी विभिन्न नगरपालिकाओं, नगर निगमों के पार्षदों, विभागीय मेयर परिषद सदस्यों की है। सूत्रों के अनुसार पार्टी इसके जरिए जनता के बीच पार्षदों की इमेज और उनके क्रियाकलाप को परखेगी। जाहिर तौर पर दूसरे चरण के अभियान के पीछे भी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी टीम की रणनीति काम करेगी।

उल्लेखनीय है कि 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले अगले साल राज्य में विभिन्न 107 नगरपालिकाओं के लिए चुनाव होना है जिनकी मियाद शेष हो चुकी है। सूत्रों की माने तो 15 अक्टूबर को तृणमूल भवन में होने वाली अहम बैठक में इस संदर्भ में कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। यहां बता दें कि दीदी के बोलो अभियान के प्रथम चरण मे पार्टी के विधायकों को जनता के बीच पहुंच कर उनकी शिकायतों को सुनने और उनके घर रात बिताने को कहा गया था।

अभियान के शुरुआत की घोषणा खुद मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं की बैठक में की थी। समझा जाता है कि अब दूसरे चरण के अभियान की घोषणा वे खुद ही 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में कर सकती हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में सभी जिलों के पार्टी अध्यक्षों व पार्टी के सभी ब्लॉक कमेटी, टाउन कमेटी सदस्यों को भी उपस्थित रहने को कहा गया है। बैठक में पार्टी महासचिव व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, ममता बनर्जी के भतीजे व डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के अलावा चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी मौजूद रहेंगे।

सूत्रों ने बताया कि तृणमूल की ओर से प्रत्येक ब्लॉक अथवा वार्ड अध्यक्ष से उनके संबंधित इलाके से 20 आम लोगों की सूची 10 दिनों के भीतर मांगी गई है। इस सूची में संबंधित व्यक्ति का नाम, पता, फोन नंबर भी जमा देने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त ब्लॉक अध्यक्षों से बूथ स्तरीय तीन पार्टी कार्यकर्ताओं की जानकारी भी मांगी गई है। नाम मिलने के बाद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संबंधित लोगों से संपर्क स्थापित करेगा। कहा गया है कि आवश्यकता अनुसार खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इनसे बातचीत कर सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि कोलकाता में वार्ड स्तर पर बूथों की संख्या तकरीबन 60 से लेकर 85 तक होती है। वहीं, बूथों की संख्या ग्रामीण इलाकों में 200 से 250 तक होती है। ऐसे में तीन लोगों को बूथ स्तर पर चयन करने के पीछे जानकारों की राय में पार्टी की कोशिश 2020 नपा चुनाव और 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने की है।

Posted By: Preeti jha

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