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पश्चिम बंगाल: जमीन की जालसाजी पर लगेगी लगाम, रजिस्ट्री से पहले एप से होगा क्रेता-विक्रेता का आधार सत्यापन

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:26 PM (IST)

पश्चिम बंगाल सरकार जमीन और मकान की जालसाजी रोकने के लिए 'आपनी' नामक मोबाइल ऐप आधारित नई तकनीकी व्यवस्था शुरू ...और पढ़ें

क्रेता-विक्रेता की पहचान का होगा तकनीकी सत्यापन

क्रेता-विक्रेता की पहचान का होगा तकनीकी सत्यापन

HighLights

  1. रजिस्ट्री कार्यालय में मौजूदगी और पहचान सत्यापन होगा अनिवार्य

  2. क्रेता-विक्रेता की पहचान का होगा तकनीकी सत्यापन।

  3. बिधाननगर में परीक्षण, फिर पूरे राज्य में लागू होगा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। किसी की जानकारी के बिना उसकी जमीन या मकान दूसरे के नाम बेचने और रजिस्ट्री कराने जैसी जालसाजी रोकने के लिए राज्य सरकार नई तकनीकी व्यवस्था शुरू करने जा रही है।

‘आपनी’ नामक मोबाइल ऐप के जरिए रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचने वाले क्रेता और विक्रेता की पहचान का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा हुए बिना रजिस्ट्री की मुख्य प्रक्रिया में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं होगी।

नवान्न सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह से बिधाननगर नगर निगम क्षेत्र में ‘आपनी’ ऐप का परीक्षण शुरू होगा। करीब दो सप्ताह तक परीक्षण चलाने के बाद चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना है।

वित्त विभाग के अधीन मुद्रांक शुल्क एवं रजिस्ट्री निदेशालय को इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन का लक्ष्य दुर्गापूजा से पहले राज्य के सभी हिस्सों में यह व्यवस्था लागू करना है।

जमीन या मकान की बिक्री के लिए रजिस्ट्री का आवेदन जमा करने के बाद खरीदार और विक्रेता दोनों को एक आवेदन संख्या दी जाएगी। इसी चरण से प्राथमिक पहचान सत्यापन शुरू होगा। इसके बाद दोनों पक्षों को अपने मोबाइल फोन में ‘आपनी’ ऐप डाउनलोड करना होगा।

ऐप के जरिए पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी खास होगी। निर्धारित आवेदन संख्या से ऐप में प्रवेश करने के बाद क्रेता या विक्रेता को मोबाइल फोन अपने सामने रखकर दो बार पलकें झपकानी होंगी। इस प्रक्रिया के बाद संबंधित व्यक्ति की पहचान सत्यापन का संदेश राज्य के निर्धारित पोर्टल पर पहुंच जाएगा।

यह संदेश केवल रजिस्ट्रार या रजिस्ट्री कार्यालय के संबंधित अधिकारी देख सकेंगे। यानी संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी और पहचान की पुष्टि हुए बिना रजिस्ट्री की अगली प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकेगी।


भौगोलिक सीमा आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल

इस व्यवस्था में भौगोलिक सीमा आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत निर्धारित तारीख पर संबंधित रजिस्ट्री कार्यालय में मौजूद रहकर ही पहचान सत्यापन कराना होगा।

घर बैठे या किसी अन्य स्थान से यह प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे कोई व्यक्ति दूसरे की पहचान का इस्तेमाल कर जमीन या मकान बेचने की कोशिश करेगा तो रजिस्ट्री कार्यालय में ही उसकी पहचान हो जाएगी। इससे पहले जमीन जालसाजी रोकने के लिए रजिस्ट्री के समय जमीन मालिक के मोबाइल फोन पर एक बार इस्तेमाल होने वाला संकेतांक भेजने की व्यवस्था शुरू की गई थी।

हालांकि प्रशासन के एक वर्ग का दावा है कि इस व्यवस्था से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण बाद में यह लगभग निष्क्रिय हो गई। इसके बाद सरकार ने तकनीक की मदद से अधिक भरोसेमंद पहचान सत्यापन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया।

सत्यापन में किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर जमीन या मकान की बिक्री की रजिस्ट्री वहीं रोक दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे फर्जी विक्रेता, पहचान की जालसाजी और मालिक की जानकारी के बिना संपत्ति हस्तांतरण जैसी घटनाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने में मदद मिलेगी।

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