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पांच नवंबर को जारी होगी बंगाल की नई औद्योगिक नीति, कैबिनेट ने दी मंजूरी

Published: Wed, 28 Oct 2026 11:37 PM (IST)

पश्चिम बंगाल सरकार 5 नवंबर को अपनी नई औद्योगिक नीति की घोषणा करेगी, जिसे राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

5 नवंबर को नई औद्योगिक नीति की घोषणा होगी।

5 नवंबर को नई औद्योगिक नीति की घोषणा होगी।

HighLights

  1. 5 नवंबर को नई औद्योगिक नीति की घोषणा होगी।

  2. निवेश, रोजगार सृजन, व्यापार सुगमता पर जोर।

  3. किसान बंधु योजना का नाम बदला, ₹3000 मिलेंगे।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से राज्य सरकार कालीपूजा व दिवाली से पहले पांच नवंबर को नई औद्योगिक नीति की घोषणा करेगी।

बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) बैठक में औद्योगिक नीति के मसौदे को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद राज्य सचिवालय नवान्न सभागार में संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि नई नीति को मंत्रियों के समूह (जीओएम) से पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी और राज्य कैबिनेट ने भी इसे स्वीकृति दे दी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पांच नवंबर को कोलकाता व राज्य के प्रमुख उद्योगपतियों की उपस्थिति में नवान्न सभागार से वह इस नीति की घोषणा करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले एक वर्ष में बंगाल देशभर के उद्योगपतियों के लिए प्रमुख निवेश केंद्र और औद्योगिक गंतव्य बनेगा।

राज्य सरकार का दावा है कि नई नीति के माध्यम से निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने, प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

नई नीति में पारदर्शी भूमि आवंटन व्यवस्था, निवेश प्रोत्साहन और बिजली शुल्क में सब्सिडी जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले उद्योगपतियों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य केवल वित्तीय रियायतों की घोषणा करना नहीं, बल्कि राज्य में उद्योग स्थापित करने और कारोबार चलाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाना है।

लालफीताशाही दूर करने और कारोबार सुगमता पर जोर

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नौ मई को पदभार संभालने के बाद राज्य में औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को गति देने को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नई औद्योगिक नीति तैयार करने की प्रक्रिया जून से चल रही थी। उद्योग मंत्री तापस राय की देखरेख में इसका मसौदा तैयार किया गया है।

नवान्न के सूत्रों के अनुसार, राज्य में उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को अब तक पर्यावरण संबंधी मंजूरी, भूमि के नामांतरण, भूमि के वर्गीकरण में बदलाव, ट्रेड लाइसेंस और भवन निर्माण की अनुमति जैसी प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

नई नीति में इन बाधाओं को दूर करने और विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई नीति में मुख्य रूप से भूमि आवंटन, बिजली और वित्तीय प्रोत्साहन से जुड़े प्रावधानों पर जोर है।

राज्य में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बड़े और एक-दूसरे से जुड़े भूखंड उपलब्ध कराना लंबे समय से चुनौती रहा है। पहले निवेशकों को किसानों से सीधे जमीन खरीदने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं के समाधान के लिए भूमि नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने की तैयारी है।

किसान बंधु योजना का नाम बदलकर होगा मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि किया गया

औद्योगिक नीति के अलावा कैबिनेट बैठक में राज्य की मौजूदा किसान बंधु योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए राज्य के किसानों के लिए बड़ी घोषणा की।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पांच नवंबर को हुगली जिले के पुरशुड़ा से मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में पहली किस्त के रूप में तीन-तीन हजार रुपये की राशि भेजेगी। राज्य के करीब 50 लाख किसानों को इसका लाभ मिलेगा।

शुभेंदु ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत केंद्र सरकार किसानों को सालाना 6,000 रुपये देती है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में राज्य में सरकार बनने पर इसके अतिरिक्त 3,000 रुपये देने का वादा किया था।

मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी। इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी हैं।

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