बंगाल: तारापीठ मंदिर में पहनावे संबंधी नियम होंगे सख्ती से लागू, हाफ पैंट; लुंगी व गमछा पहनकर प्रवेश पर रोक
पश्चिम बंगाल के बीरभूम स्थित तारापीठ मंदिर में अब श्रद्धालुओं के लिए सख्त ड्रेस कोड लागू होगा। हाफ पैंट, लुंगी और गमछा पहनकर प्रवेश वर्जित होगा।

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
हाफ पैंट, लुंगी, गमछा पहनकर प्रवेश वर्जित
पारंपरिक बंगाली और भारतीय परिधान में ही प्रवेश
मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखने का उद्देश्य
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ मंदिर में मां तारा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अब अपने पहनावे का विशेष ध्यान रखना होगा। मंदिर की धार्मिक गरिमा और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति पहनावे से जुड़े पहले से लागू प्रतिबंधों को अब सख्ती से प्रभावी करने जा रही है।
इसके तहत हाफ पैंट (बरमूडा), लुंगी और गमछा पहनकर मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं को पारंपरिक बंगाली और भारतीय परिधान में ही मंदिर में प्रवेश करना होगा। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, पहनावे को लेकर प्रतिबंध पहले से लागू हैं, लेकिन अब तक उनका पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा था।
कई श्रद्धालु इन नियमों की जानकारी के अभाव में प्रतिबंधित पहनावे या छोटे कपड़े में ही मंदिर पहुंच जाते थे। इसे देखते हुए अब नियमों का कड़ाई से पालन कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों पर सूचना और जागरूकता संबंधी बोर्ड लगाए जाएंगे।
इन बोर्डों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले ही स्वीकार्य और प्रतिबंधित पहनावे की जानकारी दी जाएगी। मंदिर समिति का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी श्रद्धालु को असुविधा पहुंचाना नहीं, बल्कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और मर्यादा को बनाए रखना है।
सहयोगी सेवायतों के लिए भी निर्धारित होंगे परिधान
मंदिर प्रबंधन केवल श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि मंदिर की पूजा व्यवस्था से जुड़े सहयोगी सेवायतों के लिए भी नियमों को व्यवस्थित कर रहा है। मंदिर समिति के सचिव पुलक चट्टोपाध्याय के अनुसार, मुख्य पुजारी पहले की तरह लाल रंग के परिधान में रहेंगे, जबकि सहयोगी सेवायतों के लिए अलग-अलग निर्धारित रंग के कपड़े लागू किए जाएंगे। कालीपूजा के बाद इसे प्रभावी करने की तैयारी है।
इसके साथ ही सहयोगी सेवायतों के पहचान पत्रों की जांच और जरूरी दस्तावेज जुटाने का काम भी चल रहा है। उल्लेखनीय है कि मंदिर समिति ने पूजा और दर्शन व्यवस्था को लेकर भी कई प्रतिबंध लागू किए हैं। इनमें श्रद्धालुओं द्वारा देवी की प्रतिमा को सीधे स्पर्श करने, स्वयं माला पहनाने, गर्भगृह में नारियल फोड़ने, अलता चढ़ाने और मदिरा अर्पित करने पर रोक शामिल है।
मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाने और गर्भगृह के भीतर तस्वीर लेने को लेकर भी सख्ती की गई है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि तारापीठ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक साधना पीठ है। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पूजा व्यवस्था से जुड़े लोगों को निर्धारित धार्मिक परंपराओं एवं नियमों का पालन करना चाहिए।
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