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बंगाल में 15 वर्षों में हुई संविदा नियुक्तियों की जांच शुरू, सभी विभागों से मांगा गया पूरा ब्योरा

Published: Sun, 01 Nov 2026 05:48 PM (IST)

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 15 वर्षों में हुई संविदा नियुक्तियों की जांच ...और पढ़ें

बंगाल में 15 वर्षों में हुई संविदा नियुक्तियों की जांच शुरू (फाइल फोटो- PTI)

बंगाल में 15 वर्षों में हुई संविदा नियुक्तियों की जांच शुरू (फाइल फोटो- PTI)

HighLights

  1. बंगाल में 15 साल की संविदा नियुक्तियों की जांच शुरू।

  2. सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट 6 नवंबर तक मांगी गई।

  3. नियमों के पालन और वैधता की पड़ताल पर जोर।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी विभागों में पिछले 15 वर्षों के दौरान हुई संविदा नियुक्तियां अब जांच के दायरे में आ गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न विभागों में अस्थायी और संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

सरकार यह पता लगाना चाहती है कि किन विभागों में कितनी नियुक्तियां हुईं और इस दौरान निर्धारित सरकारी नियमों तथा वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया या नहीं। इस पहल को पूर्ववर्ती ममता सरकार के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों की प्रशासनिक समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

नवान्न सूत्रों के अनुसार, विभिन्न सरकारी विभागों से संविदा ग्रुप डी कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट तत्काल जमा करने को कहा गया है। इस सिलसिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी सर्किलों के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियरों को पत्र भेजकर निर्धारित प्रारूप में जानकारी मांगी है।

अधिकारियों को छह नवंबर तक संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया, वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन, नियुक्ति के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और संबंधित दस्तावेजों का विवरण देना होगा। इसके अलावा किसी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने या अनुशासनहीनता से जुड़ी शिकायत होने की स्थिति में उसका ब्योरा भी मांगा गया है।

इससे स्पष्ट है कि सरकार केवल कर्मचारियों की संख्या का आकलन नहीं, बल्कि नियुक्तियों की प्रक्रिया और उनकी वैधता की भी पड़ताल करना चाहती है। प्रशासनिक स्तर पर इस कवायद के पीछे पिछले डेढ़ दशक में स्थायी पदों पर नियमित नियुक्तियों की जगह अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर बढ़ती निर्भरता को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

विपक्ष पहले भी आरोप लगाता रहा है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना नियुक्तियां की गईं।

पांच लाख तक पहुंची संविदा कर्मचारियों की संख्या

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2014 में संविदा कर्मचारियों की संख्या करीब डेढ़ लाख थी। इसके बाद विभिन्न विभागों और सरकारी संस्थाओं में अस्थायी नियुक्तियों का दायरा बढ़ता गया। वर्ष 2012 में अग्निशमन विभाग में 1692 संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई थी। इसके अगले वर्ष पुलिस सहायता के लिए सिविक पुलिस की नियुक्ति का निर्णय हुआ।

2024 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सिविक वालंटियर, ग्राम पुलिस और ग्रीन पुलिस की कुल संख्या 1.15 लाख से अधिक थी। इसी वर्ष राज्य के बजट में संविदा ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारियों की संख्या करीब 50 हजार बताई गई थी। उपलब्ध मौजूदा अनुमान के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों को मिलाकर राज्य में संविदा कर्मचारियों की कुल संख्या करीब पांच लाख तक पहुंच गई है।

नियुक्तियों की मौजूदा व्यवस्था पर उठाए सवाल

इस बीच, संविदा कर्मचारी एसोसिएशन के प्रमुख सलाहकार मनोज चक्रवर्ती ने भी नियुक्तियों की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में स्थायी पद खाली रहने के बावजूद संविदा नियुक्तियों का विस्तार हुआ है।

इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ने के साथ कर्मचारियों के भविष्य और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी चिंताएं पैदा हुई हैं। उनका सुझाव है कि योग्य संविदा कर्मचारियों को उनकी पात्रता के अनुसार स्थायी पदों पर नियुक्त करने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

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