बंगाल में सरकारी टेंडर के नियम बदले, 26 विभागों में नई ई-टेंडर व्यवस्था अनिवार्य
बंगाल सरकार ने 26 महत्वपूर्ण विभागों के लिए नई ई-टेंडर व्यवस्था अनिवार्य कर दी है, जो मंगलवार से लागू हो गई है।

बंगाल में सरकारी टेंडर के नियम बदले।
HighLights
26 विभागों में नई ई-टेंडर व्यवस्था अनिवार्य।
मंगलवार से लागू हुई ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया।
परियोजनाओं में पारदर्शिता और तेजी लाना लक्ष्य।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सरकारी परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करने और काम का ठेका आवंटित करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने 26 महत्वपूर्ण विभागों के लिए नई ई-टेंडर व्यवस्था अनिवार्य कर दी है। मंगलवार से यह व्यवस्था लागू हो गई।
अब इन विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों को सरकारी कार्यों के लिए नए टेंडर निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जारी करने होंगे। इसके बाद पुरानी व्यवस्था के तहत नए टेंडर प्रकाशित नहीं किए जा सकेंगे। वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने से सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
दरअसल, टेंडर जारी करने, आवेदन प्राप्त करने, प्रस्तावों की जांच और ठेका आवंटित करने की प्रक्रिया में होने वाली देरी का सीधा असर विकास परियोजनाओं पर पड़ता है। नई व्यवस्था के जरिए इन प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की कोशिश की जा रही है।
दूसरे चरण में 26 विभाग नई व्यवस्था से जुड़ेंगे
नई ई-टेंडर व्यवस्था की शुरुआत राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में नए पोर्टल के माध्यम से की थी। पहले चरण में लोक निर्माण विभाग सहित कुछ सरकारी विभागों को इससे जोड़ा गया था। अब दूसरे चरण में 26 और विभागों को इस डिजिटल प्लेटफार्म के दायरे में लाया गया है। इनमें कृषि, कृषि विपणन, पशुपालन विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति, उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम, पर्यटन, आवासन, मत्स्य और वन विभाग शामिल हैं।
इनके अलावा सूचना एवं संस्कृति, महिला एवं बाल कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, सहकारिता, उपभोक्ता मामले और कारागार प्रशासन विभाग को भी नई व्यवस्था अपनानी होगी।
अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, आपदा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, न्याय विभाग तथा जल संसाधन अन्वेषण एवं विकास विभाग भी इसके दायरे में होंगे। इस तरह शिक्षा, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ आपातकालीन सेवाओं तथा प्रशासनिक विभागों की टेंडर प्रक्रिया भी एक ही डिजिटल व्यवस्था के तहत आएगी।
अधीनस्थ कार्यालयों को भी करना होगा पालन
वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित विभाग अपने अधीनस्थ कार्यालयों को नई व्यवस्था से बाहर नहीं रख सकेंगे। मुख्यालय के साथ प्रत्येक अधीनस्थ कार्यालय को भी नए पोर्टल के माध्यम से ही टेंडर जारी करना होगा। इसके साथ ही पुराने पोर्टल पर उपलब्ध आवश्यक सूचनाओं और दस्तावेजों को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
सरकारी परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी स्तर पर देरी होने से निर्माण कार्य, खरीदारी और अन्य विकास योजनाओं की समयसीमा प्रभावित होती है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम सरकारी खरीद और ठेका आवंटन की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत डिजिटल ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
अब इस बदलाव का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि नई व्यवस्था से टेंडर जारी करने और परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में कितनी तेजी आती है।
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