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पश्चिम बंगालः विधानसभा में विरोधी दल के नेता की लड़ाई पहुंची SC, पार्टी को धोखा देने वालों की सदस्यता रद करने की मांग

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:18 PM (IST)

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विरोधी दल के नेता के चयन को लेकर कानूनी लड़ाई अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गई है। ...और पढ़ें

शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सर्वोच्च न्यायालय में नई याचिका दायर की

शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सर्वोच्च न्यायालय में नई याचिका दायर की

HighLights

  1. शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सर्वोच्च न्यायालय में नई याचिका दायर की।

  2. ऋतब्रत गुट के विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग

  3. विरोधी दल के नेता चयन पर कानूनी लड़ाई तेज हुई।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। विधानसभा में विरोधी दल के नेता के चयन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गई है। कालीघाट तृणमूल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में नई याचिका दायर कर बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी समेत उन विधायकों की सदस्यता रद करने की मांग की है, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्णय के खिलाफ अलग रुख अपनाया है। साथ ही उन्होंने मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। विरोधी दल के नेता के चयन में विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बसु के निर्णय को चुनौती देते हुए शोभनदेव पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। मामला अभी वहां लंबित है। इसी बीच शोभनदेव ने सर्वोच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया है।

इस मामले की शुरुआत विधानसभा चुनाव के बाद विरोधी दल के नेता के चयन से हुई। तृणमूल 80 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी। पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विरोधी दल का नेता चुना था।

तृणमूल की ओर से गत नौ मई को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र देकर इसकी जानकारी भी दी गई थी। विधानसभा अध्यक्ष ने 58 विधायकों के समर्थन के आधार पर ऋतब्रत विरोधी दल के नेता चुना। इससे पहले ही तृणमूल नेतृत्व ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत को निष्कासित करने का निर्णय लिया था।

शोभनदेव ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ममता खेमे का तर्क है कि विरोधी दल के नेता का चयन राजनीतिक दल करता है। इस प्रक्रिया में विधायक दल के भीतर बहुमत को निर्णायक नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक दल और विधायक दल अलग-अलग होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों में भी राजनीतिक दल को प्राथमिकता दी गई है।

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