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कोलकाता: कालीघाट मंदिर की वित्तीय गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सबर्ण परिवार

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:46 PM (IST)

कोलकाता के कालीघाट मंदिर में कथित अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ी और दक्षिणाकाली के गहनों को लेकर सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

कालीघाट मंदिर की वित्तीय गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग

कालीघाट मंदिर की वित्तीय गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग

HighLights

  1. सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने कालीघाट मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

  2. मंदिर की अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ी और गहनों की सीबीआई जांच की मांग।

  3. नई प्रबंधन समिति गठित करने और संचालन में तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । कोलकाता के कालीघाट मंदिर में कथित अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी और दक्षिणाकाली के गहनों को लेकर सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

परिषद के सचिव देबर्षि रायचौधरी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र भेजकर मामले की सीबीआई जांच या कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही मंदिर के संचालन में तत्काल हस्तक्षेप कर नई प्रबंधन समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।

परिषद का दावा है कि दक्षिणाकाली के गहने एक सरकारी बैंक के वाल्ट में रखे हैं, लेकिन उसकी चाबी 1980 से नहीं मिल रही है। इसलिए वाल्ट के भीतर मौजूद गहनों की वर्तमान स्थिति और उनकी सूची की जानकारी नहीं है।

परिषद ने दक्षिण 24 परगना के जिला जज से एफआइआर दर्ज कराने और वाल्ट में रखे गहनों की सूची उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया था। इस पर कार्रवाई नहीं होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा गया है।

2014 के बाद प्रबंधन समिति का चुनाव नहीं

परिषद के अनुसार मंदिर की संपत्ति और गहनों की देखरेख के लिए गठित समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इसमें पांच सेवायत और मंदिर के दैनिक कामकाज से जुड़े नहीं छह बाहरी सदस्य होते हैं तथा जिला जज इसके अध्यक्ष होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार समिति का कार्यकाल पांच वर्ष है, लेकिन 2014 के बाद इसका चुनाव नहीं हुआ। परिषद ने नई समिति में जिला जज, केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, सबर्ण परिवार के दो सदस्यों और विशिष्ट लोगों को शामिल करने की मांग की है।

परिषद का कहना है कि पहले जिला जज के समक्ष मामला उठाया गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया है।