बंगाल में सरकारी कामकाज में तेजी, पत्राचार निपटान की नई 7-दिवसीय समयसीमा तय
पश्चिम बंगाल सरकार ने विभागों के बीच फाइलों और पत्राचार के निपटान में देरी रोकने के लिए नई समयसीमा तय की है।

बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी।
HighLights
सरकारी विभागों के बीच पत्राचार निपटान की नई समयसीमा।
अब सात कार्यदिवसों में करना होगा फाइलों का निपटारा।
मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश, निगरानी भी होगी।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सरकारी विभागों के बीच फाइलों और पत्राचार के निपटारे में होने वाली देरी रोकने के लिए राज्य सरकार ने नई समयसीमा तय की है। अब एक विभाग से दूसरे विभाग को भेजे जाने वाले पत्र, प्रस्ताव और संदर्भों का निपटारा सामान्यतः सात कार्यदिवसों के भीतर करना होगा।
राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने इस संबंध में सभी सरकारी विभागों को निर्देश जारी किया है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में अनावश्यक देरी दूर करना और विभिन्न सरकारी योजनाओं व प्रशासनिक फैसलों के क्रियान्वयन में तेजी लाना है।
विभागीय सचिव करेंगे लंबित मामलों की निगरानी
मुख्य सचिव ने 28 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा है कि दूसरे विभागों से प्राप्त संदर्भों पर टिप्पणियां, विचार और सहमति देने में देरी के कारण अक्सर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
इसलिए सभी विभागों को पत्र प्राप्त होने की तारीख से सात कार्यदिवसों के भीतर उसका निपटारा करना होगा। उन्होंने निर्देश दिया है कि अंतर-विभागीय पत्राचार का निपटारा पश्चिम बंगाल सचिवालय मैनुअल, 2019, राज्य के कार्य संचालन नियमों और अन्य लागू दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाए।
समाधान नहीं होने पर मुख्य सचिव करेंगे हस्तक्षेप
आदेश के अनुसार, प्रत्येक विभाग को लंबित पत्रों और प्रस्तावों की निगरानी के लिए एक व्यवस्था विकसित करनी होगी। विभागीय सचिव नियमित रूप से लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे और निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेंगे। जिन मामलों का समाधान विभागीय स्तर पर नहीं हो सकेगा, उन्हें शीघ्र मुख्य सचिव के संज्ञान में लाना होगा, ताकि उनके हस्तक्षेप से उनका निपटारा किया जा सके।
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