'SIR से नाम हटाए जाने और चुनाव नतीजों के बीच कोई संबंध नहीं', बंगाल के सीईओ ने झूठे दावों का दिया जवाब
बंगाल के सीईओ ने यूट्यूब पर प्रसारित उन दावों को खारिज किया है जिनमें SIR के तहत मतदाता सूची से ...और पढ़ें


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डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने यूट्यूब पर पोस्ट किए गए एक विश्लेषण के दावों को भ्रामक और काल्पनिक बताते हुए खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि राज्य में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों का सीधा असर हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों पर पड़ा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक पोस्ट में सीईओ ने DeKoder के विश्लेषण का जवाब देते हुए राज्य की उन पांच विधानसभा सीटों का चुनावी डेटा सामने रखा, जहां SIR के तहत सबसे ज्यादा नाम हटाए गए थे। इनमें से चार सीटों पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की जीत हुई थी, जबकि केवल एक सीट बीजेपी को मिली।
दूसरी तरफ, जिन पांच सीटों पर सबसे कम नाम हटाए गए थे, उन सभी पांचों सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की। राज्य के शीर्ष चुनावी अधिकारी ने कहा कि आंकड़े उस राजनीतिक नैरेटिव का समर्थन नहीं करते, जो यूट्यूब वीडियो में सबसे ज्यादा और सबसे कम कटौती वाली 25 सीटों के हवाले से टीएमसी के पक्ष में -10.5% और -5.3% के वोट स्विंग का दावा कर रहा था।
महिला मतदाताओं को लेकर किए गए दावे की सच्चाई
सीईओ ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि SIR के तहत हटाये गए मतदाताओं में 62% महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि यह दावा अप्रमाणित है। अमान्य प्रविष्टियों को हटाने के कुल आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या लगभग 50% यानी करीब आधी ही है।
DeKoder के उस दावे पर भी चुनाव अधिकारी ने रुख साफ किया, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम मतदाताओं के नाम गैर-मुस्लिमों की तुलना में 52% ज्यादा हटाए गए हैं।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के पास मतदाताओं की धार्मिक पहचान के आधार पर कोई डेटा नहीं रखा जाता है। इसलिए यह पूरा विश्लेषण केवल मनगढ़ंत और अनंतिम धारणाओं पर आधारित है।
नियम और कानूनी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि तथ्य लगाए जा रहे आरोपों से मेल नहीं खाते। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के किसी भी मतदाता का नाम नहीं काटा जा सकता।
मतदाता को नोटिस जारी करना, सुनवाई का मौका देना और चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा लिखित आदेश जारी करना इस प्रक्रिया के अनिवार्य हिस्से हैं। इसके खिलाफ दो स्तरों पर अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।
सीईओ ने रेखांकित किया कि SIR का मकसद असली मतदाताओं के नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और अखंडता को बनाए रखना है।
यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ चलाई जा रही है। मतदाता सूचियां तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि अटकलों पर।
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