बंगाल विधानसभा की समितियों के आवंटन पर रार, ISF विधायक नौशाद को मिली कमान; TMC का ममता गुट भड़का
बंगाल विधानसभा की स्थायी समितियों के अध्यक्ष पदों के आवंटन पर विवाद छिड़ गया है, जिसमें ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी को एक समिति की कमान मिली है।

बंगाल विधानसभा समिति आवंटन पर सियासी घमासान (फाइल फोटो)
HighLights
बंगाल विधानसभा समितियों के अध्यक्ष पदों पर विवाद गहराया।
ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी को 'पेपर्स लेड कमेटी' मिली।
ममता गुट ने आवंटन को राजनीतिक समझौता बताया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता । बंगाल विधानसभा की 41 स्थायी समितियों के अध्यक्ष पदों के आवंटन के साथ ही राज्य का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी सूची में जहां इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी को एक समिति की कमान सौंपी गई है।
वहीं, कांग्रेस, माकपा और तृणमूल कांग्रेस के कालीघाट (ममता बनर्जी समर्थित) गुट के विधायकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
घोषित सूची के तहत 31 समितियों की कमान सत्तारूढ़ भाजपा के पास है, जबकि शेष 10 पद विपक्ष के लिए आरक्षित रखे गए हैं। भंगड़ से विधायक नौशाद सिद्दीकी को 'पेपर्स लेड कमेटी' का अध्यक्ष बनाया गया है।
वहीं, अहम माने जाने वाले पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (पीएसी) की जिम्मेदारी इस्लामपुर से टीएमसी के विद्रोही गुट के विधायक कन्हाई लाल अग्रवाल को दी गई है, जो नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हैं।
इस निर्णय से नाराज ममता गुट के वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चटर्जी ने स्पीकर रवींद्रनाथ बोस से लिखित शिकायत दर्ज कराई है। तृणमूल नेताओं का आरोप है कि यह बंटवारा भाजपा और ऋतब्रत गुट के बीच राजनीतिक समझौते का नतीजा है।
दूसरी ओर, विधानसभा सचिवालय ने पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बंटवारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और अनुभव के आधार पर हुआ है। नौशाद सिद्दीकी के पुराने अनुभव को देखते हुए उन्हें जिम्मेदारी दी गई है।
संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि असली और नकली विपक्ष नापने का कोई यंत्र नहीं बना है, सब कुछ नियमानुसार ही हुआ है।
