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बंगाल सरकार की 7वें वेतन आयोग की नई अधिसूचना से किन कर्मचारियों को होगा फायदा? समझिए पूरा गणित

Published: Fri, 06 Nov 2026 08:58 PM (IST)

बंगाल सरकार ने 25 सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों और तीन शिक्षा बोर्डों के नियमित कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया है।

बंगाल सरकार का सातवें वेतन आयोग

बंगाल सरकार का सातवें वेतन आयोग

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल सरकार ने सातवें वेतन आयोग का दायरा बढ़ाते हुए राज्य के 25 सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों और तीन प्रमुख शिक्षा बोर्डों के नियमित कर्मचारियों को भी इसके दायरे में शामिल कर लिया है। इस संबंध में राज्य के वित्त विभाग ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत अब आयोग इन संस्थानों के कर्मचारियों के मौजूदा वेतन ढांचे और सेवा शर्तों की समीक्षा कर आवश्यक सिफारिशें देगा।

वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, आयोग को कोलकाता विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, बर्द्धमान विश्वविद्यालय, कल्याणी विश्वविद्यालय, उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, विद्यासागर विश्वविद्यालय और गौड़बंग विश्वविद्यालय समेत 25 सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा का जिम्मा सौंपा गया है।

इसके साथ ही पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद और पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा बोर्ड के नियमित कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे।

शिक्षकों के बजाय गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर लागू होगा फैसला

अधिसूचना में विश्वविद्यालयों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों का स्पष्ट उल्लेख है। यानी इस फैसले के आधार पर विश्वविद्यालयों के सभी शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल मानना सही नहीं होगा। तीनों शिक्षा बोर्डों के मामले में नियमित कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों की समीक्षा की जाएगी।

आयोग को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें सौंपने को कहा गया है। 25 विश्वविद्यालयों की सूची में प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय, मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय, सिधो-कान्हो-बिरसा विश्वविद्यालय, काजी नजरुल विश्वविद्यालय, कूचबिहार पंचानन बर्मा विश्वविद्यालय, डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय, बांकुड़ा विश्वविद्यालय, रायगंज विश्वविद्यालय, बाबा साहेब आंबेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय, संस्कृत कॉलेज एवं विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, विधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय, उत्तर बंगाल कृषि विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय और आलिया विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।

वेतन वृद्धि की दर और लागू होने की तारीख अभी तय नहीं

अधिसूचना में फिलहाल किसी निश्चित वेतन वृद्धि, नए वेतनमान या बकाया भुगतान की तारीख का उल्लेख नहीं है। इसका अर्थ है कि इन कर्मचारियों के वेतन में तत्काल बढ़ोतरी की घोषणा नहीं हुई है। आयोग पहले मौजूदा वेतन ढांचे और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा और फिर अपनी सिफारिशें देगा। सरकार उन सिफारिशों पर निर्णय लेने के बाद ही नई व्यवस्था और उसके लागू होने की तारीख स्पष्ट करेगी।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 22 जुलाई के प्रस्ताव के जरिए सातवें वेतन आयोग का गठन किया था। 29 जुलाई को इसके कार्यक्षेत्र में आंशिक संशोधन किया गया था। अब पांच नवंबर की नई अधिसूचना के जरिए विश्वविद्यालयों और तीन शिक्षा बोर्डों के नियमित कर्मचारियों को भी आयोग की समीक्षा प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है।

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