कॉपियों की दोबारा जांच में 10 या अधिक अंक बढ़े तो देना होगा जवाब, बंगाल माध्यमिक बोर्ड का फैसला
पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रहा है। ...और पढ़ें

बंगाल माध्यमिक बोर्ड का बड़ा फैसला (यह तस्वीर AI काी मदद से बनाई गई है।)
HighLights
मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने की तैयारी।
युवा शिक्षकों को मूल्यांकन की जिम्मेदारी, मिलेगा प्रशिक्षण।
पुनर्मूल्यांकन में 10+ अंक बढ़ने पर परीक्षक से जवाबदेही।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता । पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड माध्यमिक परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। बोर्ड का लक्ष्य परीक्षा के बाद परिणाम जारी करने की समय-सीमा कम करना है, ताकि निर्धारित समय से पहले ही 11वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू की जा सके।
बोर्ड सूत्रों के अनुसार, इस बार अधिक संख्या में युवा शिक्षकों को उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी देने की योजना है। इससे एक परीक्षक को पहले की तुलना में अधिक कापियां जांचनी पड़ सकती हैं। हालांकि, मूल्यांकन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
नए शिक्षकों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मूल्यांकन में लापरवाही रोकने के लिए पुनर्मूल्यांकन के नियमों को भी सख्त करने पर विचार हो रहा है। यदि किसी परीक्षार्थी की उत्तरपुस्तिका की समीक्षा के बाद 10 या उससे अधिक अंक बढ़ते हैं तो संबंधित परीक्षक और मुख्य परीक्षक को तलब कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें चेतावनी भी दी जाएगी।
शिक्षक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही आगाह किया है कि नए नियमों से शिक्षकों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए। बोर्ड अध्यक्ष लालू दास ने कहा कि परीक्षार्थियों और अभिभावकों के प्रति जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए बोर्ड पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से जल्द परिणाम जारी करने के लिए प्रयासरत है।