राज्य ब्यूरो, कोलकाताः सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की ममता सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई सोमवार को स्थगित कर दी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सीबीआइ कानून के तहत राज्य की पूर्व स्वीकृति के बगैर ही चुनाव के बाद की हिंसा के मामलों की जांच आगे बढ़ा रही है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न की पीठ ने कहा कि मामले में उत्तर और प्रत्युत्तर की प्रक्रिया पूरी हो गई है। पीठ ने इसके साथ ही याचिका में अगली सुनवाई फरवरी के तीसरे हफ्ते तक टाल दी। पीठ ने पक्षों को मामले में लिखित दलीलें दायर करने का भी निर्देश दिया है।

बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर इस याचिका में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना कानून 1946 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा है कि सीबीआइ कानून के तहत अनिवार्य राज्य सरकार की स्वीकृति के बगैर ही जांच कर रही है और प्राथमिकी दर्ज कर रही है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले संकेत दिया कि वह आज दिन में सुनवाई पूरी कर सकती है। इस पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वाद में संवैधानिक कानून के सवाल उठाए गए हैं और उन्होंने मामले में बहस के लिए दो दिन का वक्त मांगा।

बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्त कपिल सिब्बल ने कहा कि यह अधिकार क्षेत्र का मामला है और इस पर सुनवाई में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। केंद्र ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि बंगाल में सीबीआइ द्वारा दर्ज चुनाव बाद हिंसा के मामलों से उसका कोई लेना-देना नहीं है और राज्य सरकार के इस वाद जिसमें उसे एक पक्ष बनाया गया है वह विचार योग्य नहीं है। वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि सीबीआइ संसद के विशेष अधिनियम के तहत स्थापित एक स्वायत्त निकाय होने के नाते वह एजेंसी है जो मामलों को दर्ज कर रही है और जांच कर रही है और इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है।

केंद्र ने पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि सीबीआइ को स्वीकृति नहीं देने की बंगाल की शक्ति पूर्ण नहीं है और जांच एजेंसी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ की जा रही जांच या अखिल भारतीय प्रभाव वाली जांच करने की हकदार है। उच्च न्यायालय के आदेश पर चुनाव बाद की हिंसा के कतिपय मामलों की जांच कर रही सीबीआइ ने कई प्राथमिकी दर्ज की हैं।

राज्य सरकार ने कलकत्त उच्च न्यायालय के आदेश पर विधान सभा चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं के संबंध में सीबीआइ द्वारा दर्ज प्राथमिकी में जांच पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने भविष्य में भी इस तरह की कोई प्राथमिकी दर्ज करने पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

Edited By: Vijay Kumar