'समान नागरिक संहिता का मकसद बच्चों की संख्या तय करना नहीं', यूसीसी पर बोले शमिक भट्टाचार्य
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना है, न कि नागरिकों की संतान संख्या तय करना।

HighLights
यूसीसी का लक्ष्य कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना है।
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार में सभी के लिए समान नियम।
अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर जारी बहस के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बड़ी भ्रांतियों को दूर किया है। उन्होंने साफ कहा कि यूसीसी का उद्देश्य नागरिकों की संतान संख्या तय करना नहीं है, बल्कि कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार सोमवार को विधानसभा में यूसीसी बिल पेश करने जा रही है। इस बीच भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि यह कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करेगा, जिससे कानूनी असमानता खत्म होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि संविधान के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जनजातियों(आदिवासियों) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा, ताकि उनकी पारंपरिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके। भट्टाचार्य के अनुसार, वर्तमान व्यक्तिगत कानूनों में बहुविवाह जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जिन्हें यूसीसी के जरिए रोका जा सकेगा।
भाजपा लंबे समय से “एक देश, एक कानून” की वकालत करती रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भी इस विचार को लगातार समर्थन देती आई है। भट्टाचार्य ने कहा कि समान नागरिक संहिता देश की एकता, न्याय और संवैधानिक समानता को मजबूत करेगी, और बंगाल में इसे लागू करना समय की मांग है।
