भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर तृणमूल का पलटवार, कुणाल घोष बोले- बंगाल का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं
तृणमूल नेता कुणाल घोष ने भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर पलटवार करते हुए कहा कि बंगाल का लोकतंत्र भाजपा के हाथों सुरक्षित नहीं है।

भाजपा के हाथों में बंगाल का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं। (पीटीआई)
HighLights
तृणमूल नेता कुणाल घोष ने भाजपा मार्च को घेरा।
बंगाल का लोकतंत्र भाजपा के साथ सुरक्षित नहीं।
एसआइआर प्रक्रिया पर राजनीतिक खींचतान बढ़ी।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में भाजपा के हाथों लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने सोमवार को कोलकाता में भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च पर पलटवार करते हुए यह आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा के लोकतंत्र बचाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर उसकी चिंता महज राजनीतिक दिखावा है।
दरअसल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सोमवार को कोलकाता में यह मार्च निकाला गया। कालेज स्ट्रीट से शुरू होकर जुलूस मध्य कोलकाता के धर्मतल्ला तक पहुंचा। इसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज लेकर विपक्षी दलों पर अराजकता फैलाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
भाजपा ने इस कार्यक्रम को विपक्ष के आरोपों के जवाब और लोकतांत्रिक संस्थाओं के समर्थन में अभियान बताया। यह मार्च दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई विपक्षी इंडिया गठबंधन की रैली के बाद निकाला गया। उस रैली में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एसआइआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
कुणाल घोष के बयान ने भाजपा के मार्च और तृणमूल के पलटवार के बीच राज्य में लोकतंत्र और एसआइआर को लेकर जारी राजनीतिक टकराव को फिर तेज कर दिया है।