कोलकाता, राज्य ब्यूरो। महानगर कोलकाता में चक्रवात एम्फन से हजारों पेड़ उखड़ने से पर्यावरणविदों ने प्रदूषण में गंभीर वृद्धि की आशंका व्यक्त की है। बताते चलें कि पिछले 2 महीने में लॉक डाउन के दौरान महानगर में वायु प्रदूषण में खासी गिरावट आई थी। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने कहा है कि 5,000 से अधिक पेड़, जिनमें से कई 50 साल से अधिक पुराने हैं, जो चक्रवात अनशन के कारण उखड़ गए हैं। हालांकि पर्यावरणविदों ने इस संख्या को 10,000 में रखा है।

पेड़ों, जो कार्बन उत्सर्जन को अवशोषित करते हैं, ने लॉकडाउन के दौरान शहर में हवा की गुणवत्ता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दरअसल शहर के एक तिहाई से अधिक सड़क किनारे के पेड़ों का सफाया हो गया गया है।

पर्यावरणविद सोमेंद्र नाथ घोष ने कहा, हम सितंबर के पहले सप्ताह से पीएम 2.5 के स्तर में गंभीर वृद्धि की आशंका है, जब अनुमानित आठ लाख वाहन सड़कों पर उतरेंगे। पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि आने वाले मानसून के मौसम के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने होंगे। केएमसी के बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स के सदस्य और पूर्व मेयर-इन-काउंसिल (पार्क), देबाशीष कुमार ने कहा, जब चीजें ठीक हो जाएंगी, तब हम एक वृक्षारोपण अभियान शुरू करेंगे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ग्रीन कवर को बहाल करने के लिए पेड़ लगाने का भी आह्वान किया है। लेकिन सबसे पहले उखाड़े गए पेड़ों को तत्काल आधार पर हटाया जाना चाहिए और जिसके लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, एक पूरी तरह से विकसित पेड़ के नुकसान की भरपाई के लिए दस पेड़ लगाने की आवश्यकता होगी। यह मानक अभ्यास है। कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) के कार्यकारी अभियंता सुधीन नंदी ने कहा कि रबींद्र सरोबर क्षेत्र में ही चक्रवात एम्फन से लगभग 200 पेड़ उखड़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि रबींद्र सरोवर झील का संरक्षक केएमडीए कम से कम 100 पेड़ों को काटेगा। बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक शिव कुमार ने कहा, अत्यंत गंभीर चक्रवात ने हावड़ा के शिबपुर में आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान में दुनिया के सबसे बड़े बरगद के पेड़ को भी नुकसान पहुंचाया है। प्रतिष्ठान के एक अधिकारी ने कहा कि वनस्पति उद्यान के कई अन्य पेड़ उखड़ गए हैं। उन्होंने कहा, हम अभी तक कुल नुकसान का आकलन कर रहे हैं। हम देखेंगे कि किन पेड़ों को बदला जा सकता है और जहां एक ही प्रजाति के पौधारोपण की आवश्यकता होगी। 

Posted By: Preeti jha

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