मनरेगा के बकाये के भुगतान की तैयारी में जुटी शुभेंदु सरकार, 15 नवंबर तक होगी पहली जांच
बंगाल में शुभेंदु सरकार ने मनरेगा के लंबित भुगतान के लिए लाभार्थियों और कार्यों के दस्तावेजों की नए सिरे से जांच शुरू की है।

मनरेगा के बकाये के भुगतान की तैयारी में जुटी शुभेंदु सरकार। (फाइल)
HighLights
मनरेगा बकाया भुगतान के लिए शुभेंदु सरकार की पहल।
लाभार्थियों और कार्यों के दस्तावेजों की होगी नए सिरे से जांच।
तीन स्तरीय जांच प्रक्रिया 31 दिसंबर तक होगी पूरी।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब मनरेगा (100 दिन रोजगार योजना) के लंबित भुगतान को लेकर शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पहल शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने बकाये के भुगतान से पहले लाभार्थियों और कार्यों से संबंधित दस्तावेजों की नए सिरे से जांच कराने का निर्णय लिया है।
इसके तहत पात्र जॉब कार्ड धारकों की पहचान और लंबित मजदूरी का सही आकलन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में 29 अक्टूबर को निर्देशिका जारी कर सभी जिलाधिकारियों को जांच प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
तीन स्तरों पर होगी दस्तावेजों की जांच
राज्य सरकार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बकाये का सत्यापन कराएगी। इसमें 2024-25 और उससे पहले के लंबित भुगतान की जांच होगी। केवल केंद्रीय डाटाबेस में नाम दर्ज होने के आधार पर किसी को भुगतान का पात्र नहीं माना जाएगा।
वास्तव में कितना काम हुआ, खर्च का सही हिसाब उपलब्ध है या नहीं, राशि का किसी अन्य मद में इस्तेमाल तो नहीं हुआ और कार्यों को प्रशासनिक एवं तकनीकी मंजूरी मिली थी या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच होगी।
इसके लिए ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर तीन स्तरीय जांच व्यवस्था बनाई गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 15 नवंबर तक ब्लॉक स्तर पर सत्यापन पूरा करना होगा। 30 नवंबर तक जिला स्तर पर जांच और रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके बाद 15 दिसंबर तक राज्य स्तर पर सभी दस्तावेजों की जांच कर अंतिम मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है।
31 दिसंबर तक केंद्र को भेजा जाएगा बकाये का हिसाब
राज्य सरकार को 31 दिसंबर तक लंबित भुगतान का पूरा ब्योरा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजना है। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर अगले साल की शुरुआत में पात्र जाब कार्डधारकों के खाते में बकाये की राशि पहुंचने की संभावना है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते केंद्र और राज्य सरकार के बीच मनरेगा के भुगतान को लेकर लंबे समय तक विवाद रहा था।
केंद्र ने खर्च का हिसाब और अन्य अनियमितताओं से संबंधित सवाल उठाते हुए राशि रोक रखी थी। तत्कालीन राज्य सरकार ने करीब 2700 करोड़ रुपये अपने खजाने से खर्च कर लगभग 30 लाख जाब कार्डधारकों की मजदूरी चुकाने का दावा किया था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद शुभेंदु सरकार ने शेष बकाये के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की है।
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