रूस से बंगाल पहुंचा दुर्लभ पक्षी, 8 साल बाद दिखा चम्मच जैसी चोंच वाला बर्ड
पश्चिम बंगाल के बकखाली में आठ साल बाद दुर्लभ 'स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर' देखा गया है। यह संकटग्रस्त प्रवासी पक्षी रूस से ...और पढ़ें

बंगाल में 8 साल बाद दिखा स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर
राज्य ब्यूरो, कोलकाता । बंगाल के तटीय इलाके में आठ साल बाद चम्मच जैसी चोंच वाला दुर्लभ पक्षी ‘स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर’ नजर आया है। इसे कोलकाता से सटे दक्षिण 24 परगना जिले के बकखाली स्थित कारगिल बीच पर देखा गया।
यह पक्षी रूस के सुदूर पूर्वी इलाके से करीब 8,000 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचा है। पैर पर लगे टैग से इसकी पहचान हुई, जो रूस में लगाया गया था। बर्डवाचर्स सोसायटी के सदस्य तीर्थंकर राय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया-‘हमें जो पता चला है, उसके अनुसार छह जुलाई, 2025 को रूस के चुकोटका क्षेत्र में इसे चूजे के रूप में टैग किया गया था। इससे पहले इस पक्षी को 2018 में बंगाल में देखा गया था।
संभवत: प्रवास मार्ग में अस्थायी आवासों के नष्ट होने, तटीय क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों से होने वाली परेशानियों और शिकार के कारण इनका आना बंद हो गया था। फिर से आना अच्छा संकेत है। यह आभास देता है कि इनके प्रवास मार्ग की कठिनाइयां कम हुई हैं।
मालूम हो कि स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर दुनिया के सबसे संकटग्रस्त प्रवासी तटीय पक्षियों में शामिल है। पूरी दुनिया में इसकी संख्या वर्तमान में 500 से भी कम बताई जाती है। पक्षियों की तस्वीरें खींचने वाले फोटोग्राफर बिमल कर्मकार ने बताया कि उन्होंने काफी साल पहले इस पक्षी की इसी जिले के भांगड़ इलाके के एक मत्स्य पालन केंद्र में तस्वीर खींची थी।
स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर की विशेषताएं
स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर की चोंच का सिरा चम्मच की तरह चौड़ा है। इसकी लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है। इसका वैज्ञानिक नाम कैलिड्रिस पिग्मिया है। प्रजनन के मौसम में इसके सिर, गर्दन और छाती पर लाल-भूरा रंग दिखाई देता है, जबकि अन्य मौसम में इसका ऊपरी शरीर भूरा-धूसर और निचला हिस्सा सफेद होता है।
यह रूस के सुदूर पूर्वोत्तर में चुकोटका और कामचटका के तटीय इलाकों में प्रजनन करता है और सर्दियों में दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय क्षेत्रों की ओर प्रवास करता है। यह समुद्र तटों की गीली रेत और कीचड़ में छोटे कृमि, झींगे तथा अन्य सूक्ष्म जीव खाता है।
