प्रकाश पांडेय, कोलकाता : मोक्ष का अर्थ जन्म और मरण के चक्र से मुक्त होने के साथ ही सर्वशक्तिमान बन जाना है। सनातन धर्म में मोक्ष तक पहुंचने के सैंकड़ों मार्ग बताए गए हैं, लेकिन गीता में इसे चार मागरें में समेटा गया है। ये मार्ग हैं कर्मयोग, साख्ययोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग। वहीं हिंदू धर्म के अनुसार धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में से मोक्ष प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का अंतिम लक्ष्य होता है। अधिकतर लोग अर्थ और काम में उलझकर ही मर जाते हैं, लेकिन अर्थ और काम में उलझे लोगों को अगर आसानी से मोक्ष यानी मुक्ति की प्राप्ति करनी है तो उन्हें इस दुर्गात्सव के दौरान महानगर के नोनापुकुर लोहापंट्टी जाना होगा। दरअसल, नोनापुकुर लोहापंट्टी दुर्गापूजा समिति अपने 69वें आयोजन वर्ष के मौके पर इस बार 'मुक्ति' थीम पर मंडप निर्माण करा रही है, जिसमें ईश्वर द्वारा निर्मित संपूर्ण पृथ्वी पर मानवकुल, जीवनकुल, प्रकृतिकुल के परिवर्तन को दर्शाया गया है। आयोजन समिति के महासचिव संजय प्रसाद साव ने बताया कि इस बार कुछ अलग करने की सोच के साथ जब हम आगे बढ़े तो मुक्ति शब्द पर हमारे शिल्पकार शातनु चटर्जी ने जोर दिया, जिसे सभी ने पसंद किया और आखिरकार इस थीम पर हमने मंडप निर्माण को मन बनाया। इस थीम के जरिए समाज में व्याप्त कुरीतियों, सांप्रदायिकता, जात-पात के भेदभाव के साथ वातावरण प्रदूषण जैसे कई गंभीर विषयों को उठाने की कोशिश की गई है, ताकि लोगों को दुर्गात्सव के दौरान जागरूक कर उन्हें सामाजिक विषयों के प्रति सजग कर सके। हमारे शिल्पी शातनु चटर्जी इसे मूर्त रूप देने में लगे हैं और जल्द इसे पूरा कर लिया जाएगा। वहीं कोलकाता नगर निगम के वार्ड संख्या 61 के पार्षद व पूजा समिति के चेयरमैन जनाब मंजर इकबाल ने कहा कि बंगाल में दुर्गात्सव एक त्यौहार मात्र न होकर आपसी मेल-मिलाप और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक अहम जरिया है और इस दौरान राज्य ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया से लोगबाग यहां इस उत्सव में शरीक होने को आते हैं। ऐसे में हर बार हम जागरूकता संदेश को कुछ खास करते हैं और इसी कड़ी में अबकी मुक्ति यानी मोक्ष विषय के जरिए समाज में व्याप्त चुनौतियों को उठाने की कोशिश की है। साथ ही उम्मीद है कि यहां मंडप दर्शन को आने वाले लोगों को हमारी थीम पसंद आएगी और वे यहां से कुछ सीख कर जाएंगे।

Posted By: Jagran

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