विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सोनागाछी में संवर रही यौनकर्मियों के बच्चों की जिंदगियां, मां की मजबूरियों के बीच मासूम बचपन को मिला सहारा

By Vishal ShresthaEdited By: Deepak Gupta
Published: Sun, 01 Nov 2026 07:48 PM (IST)

कोलकाता के सोनागाछी में 'आमरा पदातिक' संस्था ने यौनकर्मियों के बच्चों के लिए एक डे केयर सेंटर खोला है। यह ...और पढ़ें

कोलकाता के सोनागाछी इलाके में खोले गए डे केयर सेंटर में चित्रकारी करते यौनकर्मियों के बच्चे।

 कोलकाता के सोनागाछी इलाके में खोले गए डे केयर सेंटर में चित्रकारी करते यौनकर्मियों के बच्चे।

HighLights

  1. 'आमरा पदातिक' ने सोनागाछी में डे केयर सेंटर खोला।

  2. यौनकर्मियों के बच्चों को देखभाल, भोजन और शिक्षा मिल रही है।

  3. बच्चों को कला, नृत्य, मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा।

विशाल श्रेष्ठ, कोलकाता। एशिया के सबसे बड़े रेडलाइट एरिया कोलकाता के सोनागाछी की हजारों यौनकर्मियों के लिए रोजी-रोटी का संघर्ष जितना बड़ा है, अपने बच्चों की परवरिश भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण है।

काम के दौरान बच्चों को कहां छोड़ें, उनकी देखभाल कौन करेगा, उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसे हो पाएगी, ये सवाल हमेशा उनके सामने खड़े रहते हैं। सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव के कारण यौनकर्मियों के बच्चों के लिए भी सामान्य माहौल में सहजता से रहना और आगे बढ़ना आसान नहीं होता।

ऐसे में सामाजिक संस्था ‘आमरा पदातिक’ का डे केयर सेंटर बड़ा सहारा बना है। सोनागाछी इलाके की नीलमणि मित्र स्ट्रीट में शुरू किए गए इस विशेष केंद्र में यौनकर्मियों के काम पर रहने के दौरान उनके बच्चों की न केवल देखभाल हो रही है, बल्कि पौष्टिक भोजन और पढ़ाई के साथ कुछ सीखने का भी अवसर मिल रहा है।

सोनागाछी में करीब 10 हजार यौनकर्मी, उनमें करीब 60 प्रतिशत माताएं

‘आमरा पदातिक’ की एडवोकेसी ऑफिसर महाश्वेता मुखर्जी ने बताया-‘सोनागाछी में वर्तमान में करीब सात हजार यौनकर्मी रहती हैं। इसके अलावा कोलकाता व आसपास के जिलों से लगभग तीन हजार रोजाना यहां आती हैं। इनमें करीब 60 प्रतिशत की संतानें हैं। इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं, जो मां बनने के बाद परिस्थितियों और आर्थिक मजबूरियों के चलते इस पेशे से जुड़ीं।

उनपर आजीविका के साथ अपने बच्चों की सुरक्षा और उनका बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है। वे अपने बच्चों को सामान्य डे केयर सेंटर या दूसरी जगहों पर छोड़ने में सहज महसूस नहीं करतीं। उन्हें आशंका रहती है कि उनके पेशे की वजह से उनके बच्चों के साथ भेदभाव हो सकता है। हमने उनकी इस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया है। अब वे जब अपने काम पर जाती हैं तो उनके बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी हमारा सेंटर उठाता है।

फिलहाल यहां तीन से 14 वर्ष की उम्र के 95 बच्चे हैं। सुबह 10.30 बजे से शाम 6.30 बजे तक बच्चे यहां रहते हैं। उनकी देखभाल और विकास के लिए छह लोगों की टीम है। दो महिलाएं बच्चों की देखरेख करती हैं, एक रसोइया भोजन तैयार करता है और तीन शिक्षक-शिक्षिकाएं उनकी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों का ध्यान रखते हैं। बच्चों की रचनात्मक व शारीरिक क्षमता के विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। उन्हें कला एवं हस्तशिल्प, मार्शल आर्ट, नृत्य और संगीत का प्रशिक्षण दिया जाता है।

 

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।