विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बंगाल में 2 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने का प्लान, सिंगुर में अशोक लीलैंड का प्लांट लाने की तैयारी में शुभेंदु सरकार 

Published: Thu, 05 Nov 2026 09:59 PM (IST)

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सिंगुर में अशोक लीलैंड का भारी वाहन निर्माण संयंत्र स्थापित करने की संभावना जताई है। इसका ...और पढ़ें

सिंगुर में अशोक लीलैंड संयंत्र की स्थापना की संभावना।

सिंगुर में अशोक लीलैंड संयंत्र की स्थापना की संभावना।

HighLights

  1. सिंगुर में अशोक लीलैंड संयंत्र की स्थापना की संभावना।

  2. राज्य में 2 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार का लक्ष्य।

  3. टाटा नैनो के बाद सिंगुर को औद्योगिक केंद्र बनाना।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में औद्योगिक पुनरुद्धार की कोशिशों के बीच सिंगुर एक बार फिर उद्योगों को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को राज्य की नई निवेश प्रोत्साहन नीति की घोषणा के दौरान सिंगुर में अशोक लीलैंड का भारी वाणिज्यिक वाहन निर्माण संयंत्र स्थापित करने की संभावना जताई।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में कंपनी के साथ प्रारंभिक बातचीत हुई है। इसके जरिए राज्य सरकार टाटा नैनो परियोजना के हटने के बाद से औद्योगिक पहचान खो चुके सिंगुर को फिर से औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।

पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगुर में हम निश्चित रूप से कुछ करेंगे। भारी वाणिज्यिक वाहनों के एक प्रतिष्ठित निर्माता अशोक लीलैंड के साथ हमारी प्रारंभिक बातचीत हुई है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल प्रचार के लिए कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर नहीं करेगी। उसका जोर ऐसी परियोजनाओं पर रहेगा, जिन्हें वास्तव में जमीन पर उतारा जा सके।

नैनो परियोजना की वापसी के 18 साल बाद फिर औद्योगीकरण की उम्मीद

सिंगुर करीब दो दशक पहले टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाममोर्चा सरकार ने यहां टाटा मोटर्स के कारखाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी।

इस दौरान कृषि भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ तत्कालीन विपक्षी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व में लंबा आंदोलन चला। आंदोलन और विवाद के बीच वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स ने सिंगुर से परियोजना हटाने की घोषणा कर दी। बाद में नैनो कारखाना गुजरात के साणंद में स्थापित किया गया।

इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति और औद्योगिक इतिहास को गहराई से प्रभावित किया। वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई और वाममोर्चा के 34 वर्षों के शासन का अंत हुआ।

सत्ता में आने के बाद ममता सरकार ने अधिग्रहित जमीन किसानों को लौटाई थी। ममता बनर्जी ने स्वयं सिंगुर पहुंचकर धान के बीज बिखेरकर कृषि भूमि की वापसी का प्रतीकात्मक संदेश दिया था। बाद में टाटा मोटर्स के परित्यक्त कारखाने के ढांचे को भी हटा दिया गया।

अब भाजपा सरकार सिंगुर में नए औद्योगिक निवेश की संभावना तलाश रही है। शुभेंदु ने स्पष्ट कहा कि उद्योग के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों पर गोली नहीं चलाई जाएगी। उनका इशारा तत्कालीन वाममोर्चा सरकार के समय हुए जमीन अधिग्रहण विवाद और उससे जुड़े हिंसक घटनाक्रम की ओर था।

दो करोड़ शिक्षित युवा बेरोजगार, 70 लाख श्रमिकों के पलायन का दावा

मुख्यमंत्री ने राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन की जरूरत पर जोर देते हुए दावा किया कि बंगाल में करीब दो करोड़ शिक्षित युवा बेरोजगार हैं, जबकि लगभग 70 लाख श्रमिक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में चले गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी परियोजनाओं पर काम करना चाहती है, जिनसे राज्य में ही रोजगार के अवसर पैदा हों।

इस दौरान उन्होंने प्रस्तावित ताजपुर गहरे समुद्र के बंदरगाह का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, अदाणी समूह ने उन्हें बताया था कि पिछली तृणमूल सरकार के पास परियोजना स्थल पर एक एकड़ जमीन भी अपने स्वामित्व में नहीं थी, जिसके कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ऐसी बाधाओं से बचते हुए जमीन और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान देगी।

गौरतलब है कि राज्य के उद्योग मंत्री तापस राय भी पहले सिंगुर के लिए सरकार की विशेष योजना होने के संकेत दे चुके हैं। अब अशोक लीलैंड के साथ प्रारंभिक बातचीत की जानकारी सामने आने के बाद इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।