चिकन नेक पर जासूसी नेटवर्क का खतरा, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) में जासूसी और आतंकी नेटवर्क का खतरा बढ़ रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

चिकन नेक पर जासूसी नेटवर्क का खतरा (फाइल फोटो- PTI)
HighLights
हासीमारा में ISI जासूसी के आरोप में जवान गिरफ्तार।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सिम बॉक्स नेटवर्क का खुलासा।
आतंकी स्लीपर सेल और हनीट्रैप के मामले भी सामने।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी । भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बंगाल में सिलीगुड़ी कारिडोर यानी चिकन नेक पर जासूसी और आतंकी नेटवर्क की आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं। हासीमारा में तैनात एक जवान की आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
मामले में नेटवर्क से जुड़े तीसरे साथी और एक अन्य जवान दिलप्रीत सिंह का अब तक पता नहीं चलने से जांच की चुनौती बढ़ गई है। इससे पहले आईएसआई से संबंधों के संदेह में कालिम्पोंग से दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, सिलीगुड़ी महकमा के पानीटंकी स्थित भारत-नेपाल सीमा पर भी एक संदिग्ध पकड़ा गया था।
हासीमारा एयरबेस के निकट पूर्व सैनिक राजबीर सिंह की गिरफ्तारी ने इस संवेदनशील क्षेत्र में जासूसी नेटवर्क की आशंकाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल आपरेशन सेल और भारतीय सेना की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए राजबीर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को संवेदनशील सैन्य जानकारियां उपलब्ध कराने का आरोप है।
हासीमारा वायुसेना स्टेशन पर राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती के कारण यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। जांच एजेंसियां उसके संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं।
उत्तर बंगाल में संदिग्ध संचार नेटवर्क का मामला भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रहा है। सितंबर 2021 में एसटीएफ ने राज्य के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर 23 सिम बाक्स जब्त किए थे। इनमें 256 सिम स्लाट वाले उपकरण, करीब 400 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड और 17 राउटर शामिल थे। इसके बाद जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और भारत-भूटान सीमा के जयगांव से भी सिम बाक्स बरामद हुए।
मई 2024 में फूलबाड़ी-जटियाकाली में एक मोबाइल रिपेयरिंग दुकान से तीन सिम बाक्स और 93 सिम कार्ड जब्त किए गए। इस मामले में मोहम्मद साब्बिर समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
जुलाई 2024 में माटीगाड़ा और प्रधाननगर के तीन ठिकानों से पांच सिम बाक्स बरामद किए गए थे। सिम बाक्स के जरिए इंटरनेट आधारित अंतरराष्ट्रीय काल को स्थानीय मोबाइल नेटवर्क की काल के रूप में रूट किया जा सकता है, जिससे वास्तविक पहचान छिपाने की आशंका रहती है।
दिसंबर 2022 में सिलीगुड़ी के देबाशीष कालोनी से गुड्डू कुमार नामक युवक की गिरफ्तारी ने जासूसी के एक दूसरे तरीके का खुलासा किया था। आरोप था कि पाकिस्तानी हैंडलरों ने उसे हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के जरिए अपने जाल में फंसाया था। वह सुकना, बागडोगरा और सालूगाड़ा जैसे सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास की तस्वीरें खींचकर भेजता था।
वहीं, दिसंबर 2024 में बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के स्लीपर सेल का पर्दाफाश हुआ था। तब असम, बंगाल और केरल में कार्रवाई कर आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था।
इनमें बंगाल से पकड़े गए अब्बास अली और मिनारुल शेख पर स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और संगठन का नेटवर्क तैयार करने का आरोप था। इस मामले में विभागीय अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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