कोलकाता, राज्य ब्यूरो। तत्काल तीन तलाक को अपराध करार देने वाला बिल राज्यसभा से पास हो चुका है। राष्ट्रपति ने पास बिल पर हस्ताक्षर भी कर दिया और अब देश में कानून के तौर पर लागू हो जाएगा, तो वहीं पश्चिम बंगाल के एक मंत्री ने इस कानून को मानने से ही इन्कार कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में जन शिक्षा व पुस्तकालय मामले के मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी ने ऐसा बयान पहली बार नहीं दिया है। इससे पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दिया था तो सिद्दिकुल्ला ने उस फैसले को भी मानने से इन्कार कर दिया था। 

तीन तलाक को लेकर पश्चिम बंगाल के मंत्री व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दिकुल्ला चौधरी ने विवादित बयान दिया और कहा कि वह तीन तलाक बिल पास होना दुख का विषय है। यह इस्लाम पर हमला है।
सिद्दिकुल्ला चौधरी ने कहा कि हम तीन तलाक पर बने कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि जब इस पर केंद्रीय कमिटी की मीटिंग होगी तो हम आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे। तीन तलाक के खिलाफ कानून को लेकर ममता के मंत्री इस विवादित बयान से आने वाले दिनों में राजनीतिक विवाद पैदा हो सकता है। विशेष कर पश्चिम बंगाल में भाजपा के हमलावर रुख का सामना कर रहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस मुद्दे पर एक बार फिर मुसीबत झेलनी पड़ सकती है।

गौरतलब है कि मंगलवार को राज्यसभा ने तीन तलाक के खिलाफ विधेयक को मंजूरी दे दी थी और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह देश में कानून के तौर पर लागू हो जाएगा। नये बने कानून में तीन तलाक बोलने के अपराधी को तीन साल की सजा का प्रावधान है। यही नहीं इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

राष्ट्रपति ने तत्काल तीन तलाक विधेयक को दी मंजूरी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद से पारित तत्काल तीन तलाक विधेयक को मंजूरी दे दी है जिससे अब यह कानून में तब्दील हो गया है। सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। यह कानून 21 फरवरी को इस संबंध में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा।

पत्नी को तत्काल तीन तलाक के जरिये छोड़ने वाले मुस्लिम पुरुष को तीन साल तक जेल की सजा के प्रावधान वाले इस विधेयक को मंगलवार को राज्यसभा ने पारित कर दिया था। इससे पहले पिछले हफ्ते यह लोकसभा से पारित हुआ था। नया कानून 'मुस्लिम महिलाएं (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019' मुस्लिम पति द्वारा दिए जाने वाले तलाक ए बिद्दत यानी तत्काल तीन तलाक को गैरकानूनी बताता है। इस कानून के मुताबिक, अगर कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक रूप से, लिखकर या इलेक्ट्रॉनिक रूप में या किसी भी अन्य विधि से तलाक ए बिद्दत देता है तो यह अवैध माना जाएगा। तलाक ए बिद्दत में कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को तत्काल तीन बार 'तलाक' बोलकर उससे संबंध खत्म कर लेता है।

नए कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि 'तत्काल तीन तलाक' से पीडि़त महिला अपने पति से स्वयं और अपनी आश्रित संतानों के लिए निर्वाह भत्ता पाने की हकदार होगी। इस रकम को मजिस्ट्रेट निर्धारित करेगा।विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों का कहना था कि कानून की मौजूदा संरचना में उसके प्रावधानों का मुस्लिमों को परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और संसदीय समिति को इसकी समीक्षा करनी चाहिए।

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Posted By: Sachin Mishra

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