वजन घटाने जिम गईं शिवानी अब मेडल जीतकर बढ़ा रही हैं भारत का मान, अब तक जीत चुकी हैं सात विश्व केटलबेल चैंपियनशिप
कोलकाता की शिवानी अग्रवाल ने प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाने के लिए जिम जाना शुरू किया और आज वह सात बार की केटलबेल विश्व चैंपियन हैं।

वजन घटाने जिम गईं शिवानी अब मेडल जीतकर बढ़ा रही हैं भारत का मान। (सोशल मीडिया)
HighLights
सात बार की केटलबेल विश्व चैंपियन शिवानी अग्रवाल।
प्रेग्नेंसी के बाद वजन घटाने से शुरू हुई उनकी यात्रा।
चार्टर्ड अकाउंटेंट और मां होकर भी देश का मान बढ़ाया।
दीपक राम, कोलकाता। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केटलबेल में कोलकाता की शिवानी अग्रवाल भारत की सबसे मजबूत उम्मीद हैं। लेकिन उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शिवानी की कहानी एक आम कामकाजी महिला और मां की है, जिन्होंने केवल प्रेगनेंसी के बाद बढ़े वजन को घटाने के लिए जिम का रुख किया था, लेकिन आज वह सात बार की केटलबेल विश्व चैंपियन बनकर दुनिया भर में देश का मान बढ़ा रही हैं।
वर्ष 2016 में बेटे के जन्म के बाद शिवानी का वजन काफी बढ़ गया था। वह केवल खुद को फिट रखने और वजन कम करने के इरादे से कोलकाता के बंगाल रोइंग क्लब के जिम में गई थीं। स्कूल और कालेज के दिनों में कभी एक भी खेल प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने वाली शिवानी के लिए यह सिर्फ एक फिटनेस रूटीन था। जिम में उनकी मुलाकात ट्रेनर अर्नब सरकार से हुई, जिन्होंने उनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने शिवानी को केटलबेल से परिचित कराया।
शुरुआत केवल आठ किलो के सबसे हल्के केटलबेल से हुई थी जो अब 16 किलो तक पहुंच गयी है। महज एक महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप (मलेशिया, 2017) में 'बेस्ट फीमेल स्नेचर' का खिताब जीता। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
वह 2018 में उज्बेकिस्तान में केटलबेल स्पोर्ट्स में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला बनीं। इसके बाद 2019 में ऑस्ट्रेलिया, 2021 में फ्रांस, 2022 में ग्रीस, 2023 में भारत और 2024 में बेल्जियम में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में तिरंगा लहराया।
2026 में मोल्दोवा में आयोजित वर्ल्ड केटलबेल स्पोर्ट फेडरेशन (डब्ल्यूकेएसएफ) चैंपियनशिप में 16 किलो के केटलबेल के साथ 12 मिनट में 222 दोहराव मारकर उन्होंने अपना 7वां विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण पदक जीता। अब शिवानी आठवें मेडल की तैयारी में जुट गयी हैं।
हालांकि इसके पहले उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कुछ चैंपियनशिप जीतनी होगी। शिवानी ने बताया कि विश्व चैंपियनशिप में खेलने के लिए उन्हें दिसंबर में होने वाली स्टेट चैंपियनशिप, अप्रैल में होने वाली राष्ट्रीय चैंपियनशिप और जून में पुर्तगाल में होने वाली डब्ल्यूकेएसएफ विश्व चैंपियनशिप के जरिये क्वालीफाई करना होगा।
सीए, मां और चैंपियन
शिवानी केवल एक एथलीट नहीं हैं, वह एक सफल चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) और जीएसटी एक्सपर्ट भी हैं। वह घर संभालती हैं, क्लाइंट्स की फाइलें देखती हैं और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल भी जीत रही हैं। उनकी इस अद्भुत यात्रा के लिए उन्हें 'प्राइड आफ बंगाल' अवार्ड से नवाजा जा चुका है और खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उनकी सराहना कर चुके हैं।
क्या कहती हैं शिवानी
अगर आपका लक्ष्य मजबूत है, तो आप कुछ भी कर सकते हैं। मेरा यह था कि मैं अपने बच्चे के लिए एक मजबूत मां बनना चाहती थी। आज मेरा बेटा भी खेलने लगा है। मैं चाहती हूं कि केटलबेल को ओलिंपिक में शामिल किया जाए।
कैसे खेला जाता है केटलबेल
केटलबेल लोहे की एक भारी गेंद होती है जिसके ऊपर एक हैंडल लगा होता है। खिलाड़ी को एक छोटे प्लेटफॉर्म पर खड़ा होना होता है। उसे केटलबेल को 10 मिनट के समय (क्लासिक फार्मेट) में लगातार हवा में ऊपर उठाना होता है। जो खिलाड़ी इस समय सीमा के अंदर सबसे ज्यादा बार (सही तकनीक से) वजन उठाता है, वही विजेता बनता है।
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