बंगाल में शिवसेना मॉडल, दीदी के खिलाफ 'शिंदे' बना कौन? 50 विधायकों के बगावत की अटकलें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर बड़े आंतरिक कलह का सामना कर रही है, जिसमें ...और पढ़ें

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी। (फाइल फोटो)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस विधानसभा में दो हिस्सों में बंटने वाली है? ये सवाल तब उठा जब नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति ने पार्टी के अंदर की फूट को उजागर कर दिया है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि टीएमसी विधायकों का एक गुट 'बागी' ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर समर्थन देने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एक बगावत होगी, जिनकी करीबी सहयोगी और विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया गया है।
बंगाल में शिवसेना मॉडल?
दिलचस्प बात यह है कि सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी को एक अन्य विधायक संदीपान साहा के साथ पार्टी से निष्कासित कर दिया। निलंबित तृणमूल कांग्रेस नेता रिजू दत्ता ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में इस समय शिवसेना का 'महाराष्ट्र मॉडल' लागू है।
दत्ता ने कहा कि टीएमसी विधायकों का बागी गुट विधानसभा अध्यक्ष के सामने खुद को "असली टीएमसी" के तौर पर पेश करेगा। इस गुट में कथित तौर पर 50 विधायक शामिल हैं। पूर्व प्रवक्ता ने आगे कहा कि चूंकि 80 तृणमूल विधायकों में से दो-तिहाई विधायक इस गुट में शामिल हो चुके हैं, इसलिए उनका उम्मीदवार ही विधानसभा में विपक्ष का नेता होगा।
अभिषेक बनर्जी को लेकर गुस्से में विधायक
विपक्ष के नेता की नियुक्ति का मुद्दा तृणमूल को दो हिस्सों में बांटता हुआ दिख रहा है। हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से टीएमसी के भीतर असंतोष और फूट दिन-ब-दिन गहराती जा रही है। सूत्रों का कहना है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है न कि उसकी नेता ममता बनर्जी पर।
रविवार को यह दरार साफ दिखने लगई जब टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया। कोलकाता में नाराज टीएमसी विधायकों को अपने पाले में लाने और सदन में पार्टी को एकजुट बनाए रखने के लिए बैठकें चल रही हैं।
टीएमसी के लिए पेचीदा हुए हालात
अब, नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर आए ताजा मोड़ ने पहले से ही मुश्किलों से घिरी टीएमसी के लिए हालात और भी पेचीदा बना दिए हैं। यह मामला तब और भी गंभीर हो गया जब सोमवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि स्पीकर को भेजे गए उस पत्र पर टीएमसी के कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे, जिसमें चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नामित किया गया था।
अधिकारी ने तृणमूल के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा का नाम लिया, जिन्होंने शोभनदेव चट्टोपाध्याय का समर्थन करने वाले पार्टी के एक पत्र में अपने हस्ताक्षरों की जालसाजी को लेकर शिकायत की थी।
उन्होंने कहा, "तृणमूल के भ्रष्टाचार ने न केवल बंगाल की जनता को निशाना बनाया, बल्कि अपने ही विधायकों को भी। तृणमूल ने अपने ही विधायकों के हस्ताक्षर चुराए। इसकी शिकायत तृणमूल के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने की थी। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं थी।"
टीएमसी ने इन दोनों विधायकों को पार्टी से निकाला
बाद में तृणमूल ने इन दोनों विधायकों को पार्टी से निकाल दिया। साहा ने इस मामले के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पार्टी के महासचिव ने ही विधायकों की सूची पर हस्ताक्षर किए थे।
पश्चिम बंगाल सीआईडी हस्ताक्षर में हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही है। इस मामले में तृणमूल के कई नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए तलब किया था।
पार्टी के कामकाज को लेकर उठे सवाल
राज्य में सत्ता गंवाने के बाद से पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी के कामकाज को लेकर खुले तौर पर असंतोष व्यक्त किया है। तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा हालात पर तंज कसते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री दिलीप घोष ने सोमवार को कहा, "पार्टी में अब सिर्फ बुआ और भतीजा (ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी) ही बचेंगे और बाकी सभी नेता पार्टी छोड़कर चले जाएंगे।"
