पुणे से एयरलिफ्ट कर कोलकाता लाया गया दुर्लभ ग्रुप का ब्लड, मरीज की बची जान
कोलकाता में एक 71 वर्षीय मरीज की जान बचाने के लिए पुणे से दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप का रक्त विमान ...और पढ़ें

पुणे से एयरलिफ्ट कर कोलकाता लाया गया दुर्लभ ग्रुप का ब्लड (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
पुणे से कोलकाता एयरलिफ्ट किया गया दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप।
71 वर्षीय मरीज सैफुल सरदार की जान बचाने में मदद मिली।
बंगाल में 56 हजार में सिर्फ छह लोगों में यह समूह मिला।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता । बंगाल में दुर्लभ बाम्बे ब्लड ग्रुप के रक्त की जरूरत पड़ने पर पुणे से विमान के जरिए रक्त मंगाया गया। इससे कैंनिंग निवासी 71 वर्षीय सैफुल सरदार की जान बचाने में मदद मिली। सैफुल कोलकाता के केपीसी मेडिकल कालेज में भर्ती हैं, जहां डा. कौशिक साह की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
ऑपरेशन के लिए इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप के रक्त की जरूरत थी। ऐसे में ‘लेट अस केयर फार यू’ संगठन ने पुणे से रक्त मंगाने की व्यवस्था की।
फेडरेशन आफ इंडियन ब्लड डोनर आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की गवर्निंग बाडी के सदस्य विश्वरूप बिश्वास के अनुसार, रक्त को विशेष तापमान पर विमान से लाना पड़ता है।
कोलकाता पहुंचने के बाद रक्त की दोबारा जांच की जाती है, ताकि उसके सभी घटकों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि बंगाल में बाम्बे ब्लड ग्रुप के करीब 20-22 लोगों की सूची तैयार की गई है। जरूरत पड़ने पर उनसे संपर्क किया जाता है। राज्य में इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप की मांग बढ़ रही है।
56 हजार लोगों की जांच में मिले थे केवल छह
बाम्बे ब्लड ग्रुप बेहद दुर्लभ है। भारत में औसतन प्रति 10 हजार लोगों में एक व्यक्ति में यह ब्लड ग्रुप मिलने का अनुमान है। बंगाल में 56,465 लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में केवल छह लोगों में यह ब्लड ग्रुप मिला था।
रक्त का समूह लाल रक्त कोशिकाओं पर मौजूद एंटीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर निर्धारित होता है। बाम्बे ब्लड ग्रुप में एच एंटीजन नहीं होता, जिसके कारण सामान्य एबीओ ब्लड ग्रुप का रक्त ऐसे मरीजों को नहीं दिया जा सकता। इस समूह के मरीज को सुरक्षित रूप से रक्त देने के लिए इसी दुर्लभ ब्लड ग्रुप के दाता की जरूरत होती है।
