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बंगाल: कारबला चाय बागान में दंतैल हाथी का आतंक, बुजुर्ग को कुचलकर मार डाला

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:47 PM (IST)

नागराकाटा में हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ रहा है, जहां बनारहाट के कारबला चाय बागान में एक रेडियो कालर वाले हाथी ने 60 वर्षीय भुआ ओरांव को कुचलकर मार डाला।

आमबाड़ी चाय बागान की ओर बढ़ता दंतैल हाथी।

आमबाड़ी चाय बागान की ओर बढ़ता दंतैल हाथी।

HighLights

  1. रेडियो कालर वाले हाथी ने बुजुर्ग भुआ ओरांव को कुचला।

  2. बनारहाट के कारबला चाय बागान में हुई यह दुखद घटना।

  3. नागराकाटा क्षेत्र में हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ रहा है।

जागरण संवाददाता, नागराकाटा। नागराकाटा और आसपास के इलाकों में बिछड़े हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक हाथियों के हमले मुख्य रूप से घरों में तोड़फोड़ और फसलों को नुकसान पहुंचाने तक सीमित थे, लेकिन सोमवार को एक दंतैल हाथी के हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई।

घटना बनारहाट के कारबला चाय बागान में सोमवार दोपहर हुई। मृतक की पहचान भुआ ओरांव (60) के रूप में हुई है। वह पास के रियाबाड़ी चाय बागान के न्यू लाइन इलाके के निवासी थे।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, भुआ सोमवार को मवेशी चराने के लिए निकले थे। इस दौरान वह रेती नदी के बांध के पास एक अन्य व्यक्ति के साथ आराम कर रहे थे। तभी गले में रेडियो कालर पहने एक विशाल दंतैल हाथी अचानक उनकी ओर दौड़ पड़ा।

हाथी को अपनी ओर आता देख उनके साथ मौजूद व्यक्ति किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा, लेकिन भुआ को हाथी ने मौके पर ही कुचल दिया। सूचना मिलने पर वन विभाग के बानरहाट रेंज के कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और शव को बरामद कर ले गए।

वनकर्मियों की घेराबंदी और पीछा करने पर रेडियो कालर वाला दंतैल हाथी सुरेंद्रनगर चाय बागान की ओर चला गया। इससे डायना रेंज के वनकर्मियों की परेशानी और बढ़ गई है। इस रेंज में पहले से ही बेलचा, माताल और रेडियो कालर पहने एक अन्य छोटे दंतैल समेत कुल पांच बिछड़े हाथियों का उत्पात जारी है।

रविवार रात करीब 40 हाथियों का एक झुंड भी डायना रेंज के खेरकाटा जंगल में पहुंच गया है। यह भी नया झुंड बताया जा रहा है।

लालझामेला बस्ती में बेलचा हाथी का आतंक

वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती लालझामेला बस्ती में बेलचा नामक दंतैल हाथी बना हुआ है। यह हाथी दिनभर लालझामेला के पास डायना जंगल में रहता है और शाम होते ही भूटान से उतरकर डायना नदी पार करते हुए बस्ती में घुस जाता है।

हाथी चार से पांच अलग-अलग रास्तों से बस्ती में प्रवेश करता है। वनकर्मियों और हाथी के बीच रातभर पीछा करने और बचाव का सिलसिला चलता रहता है। मौका मिलते ही हाथी घरों में तोड़फोड़ कर निकल जाता है।

 

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