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रवींद्र भारती विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप, एबीवीपी नेता भेजेंगे कानूनी नोटिस

Published: Sat, 03 Oct 2026 11:09 PM (IST)

रवींद्र भारती विश्वविद्यालय की इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी साइंस प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

रवींद्र भारती विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप।

रवींद्र भारती विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप।

HighLights

  1. रवींद्र भारती विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में अनियमितता का आरोप।

  2. छात्र परिषद ने एबीवीपी नेता शुभब्रत अधिकारी पर लगाया आरोप।

  3. शुभब्रत अधिकारी ने आरोपों को निराधार बताकर कानूनी नोटिस भेजा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी साइंस की प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर विवाद शुरू हो गया है। छात्र परिषद ने एबीवीपी की केंद्रीय समिति के सदस्य शुभब्रत अधिकारी पर परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

शुभब्रत ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए आरोप लगाने वालों को कानूनी नोटिस भेजने की बात कही है।

छात्र परिषद के महासचिव (कोषाध्यक्ष) शाक्यदीप बसु ने बताया कि 29 सितंबर को इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी साइंस की प्रवेश परीक्षा हुई थी। संगठन का दावा है कि परीक्षा में शामिल कुछ परीक्षार्थियों से मिली जानकारी के आधार पर विश्वविद्यालय में लिखित शिकायत की गई है।

आरोप है कि परीक्षा केंद्र में तैनात एक निरीक्षक ने मोबाइल फोन के जरिये शुभब्रत को उत्तर लिखने में मदद की। यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिल गया था।

संगठन ने विश्वविद्यालय से पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके तहत सीसीटीवी फुटेज की जांच, निरीक्षकों की ड्यूटी सूची देखने और परीक्षार्थियों तथा निरीक्षकों के बयान दर्ज करने का सुझाव दिया गया है।

जांच पूरी होने तक परिणाम रोकने और अनियमितता साबित होने पर संबंधित परीक्षार्थी का आवेदन रद करने की मांग भी की गई है।

शुभब्रत ने आरोपों को बताया निराधार

शुभब्रत अधिकारी ने सभी आरोपों से इनक किया है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आरोप लगाने वालों को आपराधिक मामले का कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की जांच में आरोप साबित नहीं हुए तो वह आरोप लगाने वालों के खिलाफ हाई कोर्ट में मामला करेंगे।

विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि सोशल मीडिया पर सामने आए शिकायत संबंधी ई-मेल के आधार पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। सोमवार को मामले की पूरी जानकारी देखने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।