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बंगाल में माध्यमिक परीक्षा की तारीख बदलने का प्रस्ताव, 15 फरवरी के बजाय दो मार्च से कराने की तैयारी

Published: Tue, 03 Nov 2026 06:30 AM (IST)

पश्चिम बंगाल में 2027 की माध्यमिक परीक्षा की तारीखों में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी ...और पढ़ें

बंगाल में 2027 की माध्यमिक परीक्षा का कार्यक्रम बदलने की तैयारी। (फाइल फोटो।)

बंगाल में 2027 की माध्यमिक परीक्षा का कार्यक्रम बदलने की तैयारी। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. माध्यमिक परीक्षा 2027 की तारीखें बदलने का प्रस्ताव।

  2. शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी के कारण बदलाव की मांग।

  3. परीक्षा 15 फरवरी के बजाय 2 मार्च से शुरू होगी।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में 2027 की माध्यमिक परीक्षा का कार्यक्रम बदलने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष लालू दास ने सोमवार को स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर परीक्षा 15 फरवरी के बजाय दो मार्च से शुरू कराने का प्रस्ताव दिया है।

फिलहाल विभाग की ओर से इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। जुलाई में घोषित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा 15 से 25 फरवरी तक होनी है।

क्यों उठाया गया ये कदम?

दरअसल, केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए 25 जनवरी से 28 फरवरी तक का समय निर्धारित किया है। इसके बाद एक से पांच मार्च तक संशोधन का काम भी प्रस्तावित है। जनगणना के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। ऐसे में माध्यमिक परीक्षा के आयोजन और जनगणना दोनों काम एक साथ संचालित करने में परेशानी की आशंका जताई जा रही है। शिक्षकों की तैनाती को लेकर इसी तरह की चिंता सामने आई है।

परीक्षा केंद्रों के संचालन से लेकर पढ़ाई तक पर असर

शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी का असर केवल परीक्षा लेने तक सीमित नहीं रह सकता। माध्यमिक परीक्षा के लिए विभिन्न स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। इन केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में शिक्षक, निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों की जरूरत होती है। यदि शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाया जाता है तो परीक्षा संचालन प्रभावित हो सकता है।

दूसरी ओर, परीक्षा के दौरान शिक्षकों को जनगणना से अलग रखने पर निर्धारित समय में जनगणना का काम पूरा करने में दिक्कत आ सकती है। शिक्षकों ने पहले चरण के जनगणना कार्य के दौरान स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की बात भी उठाई है। कुछ स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण नियमित कक्षाएं संचालित करने में परेशानी हुई थी।

लिहाजा, नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारियों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। बोर्ड ने नए प्रस्ताव में परीक्षा कार्यक्रम को इस तरह समायोजित करने की बात कही है कि उच्च माध्यमिक परीक्षा, प्रवेश परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ तारीखों का टकराव न हो।

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