राष्ट्रपति के दौरे में प्रोटोकॉल का उल्लंघन: केंद्र और ममता सरकार आमने-सामने, क्यों हुआ इतना विवाद? पूरी डिटेल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बंगाल दौरे पर प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर केंद्र और ममता सरकार आमने-सामने हैं। केंद्र ने सीएम ...और पढ़ें

राष्ट्रपति की सुरक्षा और सम्मान से संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन

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इंद्रजीत सिंह, कोलकाता। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बंगाल दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल (शिष्टाचार के नियम) उल्लंघन को लेकर केंद्र और ममता सरकार आमने-सामने हैं। केंद्र ने ब्लू बुक नियमों के उल्लंघन पर बंगाल सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
आरोप है कि राष्ट्रपति के स्वागत व कार्यक्रम में सीएम या मंत्री मौजूद नहीं थे, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे निजी आयोजन बताते हुए आरोपों को खारिज किया है। बता दें कि राष्ट्रपति शनिवार को बंगाल के सिलीगुड़ी में निजी संगठन अंतरराष्ट्रीय संथाल परिषद की ओर से आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को संबोधित करने पहुंची थीं।
केंद्र का आरोप है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा और सम्मान से संबंधित ब्लू बुक के नियमों (मुख्य अतिथि की उपस्थिति आदि) का उल्लंघन किया गया है। केंद्र ने चार मुद्दे उठाए हैं। पहला राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक उपस्थित क्यों नहीं थे?
दूसरा राष्ट्रपति के लिए बनाए गए शौचालय में पानी नहीं था। तीसरा प्रशासन द्वारा चुना गया मार्ग कचरे से भरा हुआ था। चौथा दार्जिलिंग के जिलाधिकारी, सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिलाधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
वहीं ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह एक गैर-सरकारी (निजी) कार्यक्रम था। कार्यक्रम में प्रबंधन की जिम्मेदारी निजी आयोजक और केंद्र सरकार के अधीन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की थी। इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम के आयोजक ने राज्य सरकार को कोई जानकारी भी नहीं दी थी। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में कुप्रबंधन की जिम्मेदारी निजी आयोजक और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की है।
प्रधानमंत्री ने बताया शर्मनाक व अभूतपूर्व
दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे शर्मनाक व अभूतपूर्व बताया है। पीएम ने कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तीकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।
जबकि ममता बनर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है। वैसे भी वह इस दिन कोलकाता में धरना मंच पर उपस्थित थीं। इससे पहले, राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष व्यक्त किया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने उनकी यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात क्यों नहीं की। राज्यपाल बदल गए हैं और इसलिए नहीं आ सके। ममता ने कहा कि जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम के लिए चुने गए स्थल पर व्यवस्थाओं की कमी को लेकर चिंता जताई थी।
राष्ट्रपति के आगमन पर प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य
किसी राज्य में राष्ट्रपति के आगमन व विदाई पर (कार्यक्रम निजी हो या आधिकारिक) प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होता है, क्योंकि वे देश के प्रथम नागरिक और संवैधानिक प्रमुख होते हैं। हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन या आगमन स्थल पर राष्ट्रपति का स्वागत राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा किया जाना अनिवार्य माना जाता है।
यदि मुख्यमंत्री किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो सकते, तो उन्हें अपनी जगह राज्य के किसी वरिष्ठ मंत्री को नामित करना चाहिए। मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति भी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। लेकिन सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति के स्वागत अथवा कार्यक्रम में इसमें से कोई मौजूद नहीं था।
ममता का कहना है कि जो प्रोटोकॉल सूची मिली थी, उसके अनुसार ही सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर, दार्जिलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त ने राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई की।
सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की
सुरक्षा और प्रोटोकॉल के सख्त नियम ब्लू बुक में दर्ज होते हैं, जिसका पालन करना राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार को राष्ट्रपति के लिए आवश्यक परिवहन और ठहरने की व्यवस्था करनी होती है। सरकार का दावा है कि सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति के कार्यक्रम में राज्य प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
