राज्य ब्यूरो, कोलकाता।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सलाहकार अमित खरे ने कहा है कि देश को बौद्धिक संपदा में महाशक्ति बनने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की बौद्धिक संपदा (आईपी) में एक महाशक्ति बनने की आकांक्षा है इसलिए लोगों को ज्ञान का सृजन करना चाहिए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) खड़गपुर के 72वें स्थापना दिवस पर गुरुवार को खरे ने कहा-‘हमारे अतीत के ज्ञान को भविष्य’से जोड़ने की आवश्यकता है और इसमें आइआइटी जैसे संस्थानों की अहम भूमिका है, क्योंकि हम 100 साल पुरानी सभ्यता हैं, हमारे पास ज्ञान का एक भंडार है और हम इसे विकसित कर सकते हैं और आइआइटी जैसे संस्थानों की मदद से इसे निखार सकते है।’

बौद्धिक संपदा में महाशक्ति बनने की जरूरत

देश को बौद्धिक संपदा (आइपी) में महाशक्ति बनने की आवश्यकता पर, खरे ने कहा-‘हम एक आइटी महाशक्ति हैं लेकिन हमें आइपी में एक महाशक्ति बनने की जरूरत है क्योंकि ज्ञान में असीम शक्ति होती है। हम प्रौद्योगिकियों को उधार नहीं ले सकते और उनका स्वदेशीकरण नहीं कर सकते, हमें नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थानों की आवश्यकता है। हमें उस ज्ञान का सृजन करना है। सामाजिक जिम्मेदारियां हर संस्थान से जुड़ी होती हैं। आइआइटी खड़गपुर स्थानीय संस्थानों के साथ सहयोग कर सकता है और स्थानीय विकास और तकनीकी सहायता प्रदान करके उनकी मदद कर सकता है।’

संस्था और समाज के बीच होना चाहिए जुड़ाव

अमित खरे ने कहा कि संस्था और समाज के बीच एक जुड़ाव होना चाहिए। समाज को जिज्ञासा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। खरे ने कहा कि देश में एक हजार साल पहले गुरुकुल का जो विचार था, वही आधुनिक दृष्टिकोण और नई तकनीक के साथ आज आइआइटी खड़गपुर में मौजूद है। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पांच दृष्टिकोणों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि युवाओं का समग्र विकास राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में एक अहम बिंदु है जिसे यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है कि प्रत्येक बच्चा जो कुछ भी क्षमता रखता है, उसे प्राप्त कर सकता है।

Edited By: Sonu Gupta