राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल सरकार ने लॉकडाउन के दौरान निजी क्षेत्र के कर्मचारियों व श्रमिकों को वेतन देने के लिए बैंक संबंधी कार्यों के लिए प्राइवेट कंपनियों को सिर्फ दो दिनों के लिए दफ्तर खोलने की अनुमति दी है। इस दौरान सिर्फ दो कर्मचारियों के साथ ही दफ्तर खोलने की अनुमति दी गई है। यानी दो से ज्यादा कर्मचारी दफ्तर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। राज्य सचिवालय नवान्न की ओर से इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी गई है।

इसमें साफ कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान सिर्फ निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और श्रमिकों को वेतन देने के लिए बैंक संबंधी कार्यों के लिए अधिकतम दो कर्मचारियों के साथ दो दिनों के लिए निजी कंपनियों को खोलने की अनुमति दी जा रही है। इस संबंध में कंपनियों के आग्रह पर स्थानीय पुलिस स्टेशन व एसडीओ ऑफिस से दफ्तर खोलने संबंधी पास दिया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि इस दौरान सोशल डिस्टेंशिंग का पूरा पालन करना होगा।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए 21 दिनों के लिए 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन है। इस दौरान सिर्फ जरूरी सेवाओं को ही बंद से छूट दी गई है। इससे पहले सोमवार को राज्य सरकार ने मिठाई दुकानों को भी हर दिन सिर्फ 4 घंटे के लिए खोलने की अनुमति दी थी।

कूपन के जरिए मिलेगा राशन

अब बंगाल में जिनके पास राशन कार्ड नहीं उन्हें भी राशन मिलेगा। जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं उन्हें राज्य के खाद्य विभाग की ओर से एक कूपन दिया जाएगा जिससे वे सरकारी जनवितरण प्रणाली की दुकानों से जाकर राशन ले सकेंगे। कहा जा रहा है कि इस समय राज्य में करीब तीन लाख एेसे लोग हैैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। ऐसे लोगों तक राशन पहुंचाने के लिए मंगलवार को खाद्यमंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने जिलावार बैठक की जिसमें निर्णय लिया गया है कि उन तीन लाख लोगों को तत्काल प्रभाव से कूपन दिया जाएगा, ताकि वे लोग फ्री राशन ले सकें। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलान किया है कि आगामी छह माह तक लोगों को मुफ्त चावल, गेहूं -आटा दिया जाएगा। जिससे राज्य के करीब 7.86 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिलेगा। इसके अलावे 1.20 करोड़ लोग कम कीमत पर चावल व गेहूं खरीद सकते हैं। जिन लोगों के पास राशन कार्ड नहीं ऐसे गरीब लोगों को कूपन दिया जा रहा है। इसके लिए ब्लॉक स्तर से सूची तैयार कर लोगों तक कूपन भेजा जा रहा है ताकि वे अपने निकटवर्ती राशन दुकानों से जाकर चावल, गेहूं और आटा ले सके।

कोरोना से प्रभावित छोटी औद्योगिक इकाइयों के लिए ऋण वसूली पर रोक की मांग

छोटी औद्योगिक इकाइयों के लिए ऋण वसूली पर रोक की मांग की गई है। छोटे और मध्यम उद्यमियों ने मोदी सरकार से 30 सितंबर तक ऋण चुकौती पर छह महीने की मोहलत देने का आग्रह किया है। पवन पहाड़िया, अध्यक्ष कलकत्ता सिटिज़न्स इनिशिएटिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजा है जिसमें कहा गया है कि एमएसएमई उद्योग अपने ओवरहेड लागत - मजदूरी बिल, बिजली की लागत, नकद क्रेडिट पर ब्याज और ओवरड्राफ्ट सुविधाओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

ऋण रोक जिसकी घोषणा पिछले सप्ताह आरबीआई द्वारा अपने अनिर्धारित मौद्रिक नीति निर्माताओं की बैठक में की गई थी, को व्यवसायों को कोरोनो वायरस संकट के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद करने के लिए दी गई थी। लेकिन छोटे व्यवसायों के एक वर्ग का मानना ​​है कि तीन महीने के बजाय, स्थगन को कम से कम छह महीने तक बढ़ाया जाना चाहिए। कर सलाहकार तथा अर्थशास्त्री नारायण जैन ने कहा फरवरी, 2020 के महीने के बाद से, ऑटोमोबाइल, स्टील, बुनियादी ढांचे और अन्य सहायक जैसे कई क्षेत्रों ने कोविद -19 के प्रतिकूल प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया। कीमतें गिरने लगी हैं और बाजार का परिदृश्य प्रतिकूल हो गया है। ग्राहकों को खरीदने के लिए अनिच्छुक हैं और बिक्री सुस्त हो गई है, कलकत्ता के नागरिक पहल ने प्रधान मंत्री को एक पत्र में कहा है।

एसबी चाचान, संचलक एमएसएमई इकाइ, ने कहा उद्योग अपने ओवरहेड लागत - मजदूरी बिल, बिजली की लागत, नकद क्रेडिट पर ब्याज और ओवरड्राफ्ट सुविधाओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है, और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बैंक वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान एमएसएमई खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित न करे। कल्याणी के लघु उद्यमी तथा एनजीओ कंसर्न कलकत्ता के अध्यक्ष केएस अधिकारी ने कहा कि सरकार को इन छोटे व्यवसायों के लिए वेतन बिल, न्यूनतम बिजली बिल और लॉकडाउन अवधि के दौरान बैंकों को ब्याज का भुगतान करके बचाव पैकेज के साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में किसानों को समय-समय पर बेलआउट दिया गया था , और अब यह समय है जब केंद्र छोटे व्यवसायों को बचाने के लिए कदम उठाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि बैंकों से कहा जाए कि वे फंड आधारित ऋण दरों की अपनी सीमांत लागत पर एमएसएमई को धनराशि उधार दें, जो कि न्यूनतम ब्याज दर है जो बैंक अपने उधारकर्ताओं से वसूलता है। इस तरह के अभूतपूर्व मंदी के दौरान सबसे अधिक क्रेडिट योग्य ग्राहकों को एमसीएलआर दर पर ऋण मिलना चाहिए। 

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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