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7 लाख के इनामी कुख्यात माओवादी दंपती ने किया सरेंडर, बंगाल और झारखंड में थे वॉन्टेड

Published: Fri, 23 Oct 2026 03:41 PM (IST)Updated: Fri, 23 Oct 2026 03:44 PM (IST)

कोलकाता पुलिस एसटीएफ के सामने कुख्यात माओवादी दंपती मंगल करमाकर और मालती ने भारी मात्रा में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया।

माओवादी दंपती ने किया सरेंडर।

माओवादी दंपती ने किया सरेंडर।

HighLights

  1. कुख्यात माओवादी दंपती मंगल और मालती ने आत्मसमर्पण किया।

  2. AK-47 और इंसास राइफल जैसे हथियार सौंपे पुलिस को।

  3. पश्चिम बंगाल अब सक्रिय माओवादी सदस्यों से पूरी तरह मुक्त।

जागरण संवाददाता, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में लाल आतंक के नेटवर्क पर पुलिस ने एक और बड़ी सफलता दर्ज की है। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के समक्ष शुक्रवार को कुख्यात माओवादी दंपती ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों व कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण करने वाले दंपती का नाम मंगल करमाकर उर्फ मनोज करमाकर और उनकी पत्नी मालती उर्फ छोटो मांडी हैं। मंगल पुरुलिया के सालबोनी का निवासी है, जबकि मालती झाड़ग्राम के गोपीबल्लभपुर की रहने वाली है। इन दोनों पर पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस की ओर से लाखों रुपये का इनाम घोषित था।

'अत्याधुनिक हथियारों के साथ किया समर्पण'

कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने बताया, "एसटीएफ के समक्ष दो सक्रिय माओवादी सदस्यों मंगल और मालती ने अपने अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। मंगल ने एक एके-47 राइफल और कारतूस और मालती ने एक इंसास राइफल और मैगजीन पुलिस कौ सौंपा है।"

कमिश्नर ने बताया कि मंगल पर झारखंड सरकार द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने दोनों कैडरों पर 2-2 लाख रुपये का इनाम तय कर रखा था। मंगल के खिलाफ सालबोनी व अन्य थानों में करीब 6 से 7 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

किशनजी और आकाश दस्ते के करीबी, सारंडा में थे सक्रिय

माओवादियों के इतिहास और उनके नेटवर्क की जानकारी साझा करते हुए पुलिस कमिश्नर ने बताया कि माओवादी दंपती वर्ष 2010 के आसपास माओवादी संगठन में शामिल हुए थे। कमिश्नर अजय नंद ने कहा, "शुरुआती दिनों में मंगल माओवादी कमांडर किशनजी का करीबी सहयोगी रहा। बाद में वह शीर्ष माओवादी नेता आकाश के संपर्क में आया और उसके बॉडीगार्ड के रूप में भी तैनात रहा। वहीं मालती रंजीत मुंडा दस्ते में शामिल थी।"

कमिश्नर के अनुसार, वर्ष 2011-12 तक ये बंगाल के जंगलमहल (सालबोनी व सीमावर्ती क्षेत्र) में सक्रिय रहे। हालांकि, राज्य पुलिस के कड़े अभियानों के बाद वर्ष 2012 के अंत में ये झारखंड शिफ्ट हो गए। पहले ये दलमा और सरायकेला और बाद में झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र में जाकर छिप गए थे। हाल के महीनों में जब सारंडा के जंगलों में केंद्रीय बलों और पुलिस का शिकंजा कसा, तो इनके लिए वहां टिकना मुश्किल हो गया और इन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना।

पश्चिम बंगाल अब माओवादी सक्रियता से पूरी तरह मुक्त

माओवादी दस्ते के मौजूदा वजूद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने कहा कि बंगाल से ताल्लुक रखने वाले माओवादी दस्ते के सभी 13 मुख्य सदस्यों का पूरा ब्यौरा पुलिस के पास उपलब्ध हो चुका है।

उन्होंने कहा, "हाल ही में झारखंड पुलिस ने तीन सदस्यों रवि, मदन और मीरा को गिरफ्तार किया था। इससे पहले अनीता, पुष्पा, सचिन, जोबा, मीता और मथाई पातर जैसे कैडरों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि आकाश और बेला को कोलकाता में पकड़ा गया था।"

कमिश्नर ने कहा, "आज मंगल और मालती के आत्मसमर्पण के साथ ही हमारे पास उस 13 सदस्यीय दल का पूरा हिसाब पूरा हो गया है। अब पश्चिम बंगाल में कोई भी ऐसा चिन्हित सक्रिय माओवादी सदस्य या दस्ता नहीं बचा है। राज्य में वर्ष 2012 के बाद से माओवादी हिंसा की कोई वारदात नहीं हुई है।"

आत्मसमर्पण करने वाले दोनों कैडरों ने स्वीकार किया कि सशस्त्र हिंसा से समाज में बदलाव नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि संगठन के खोखले वादों से मोहभंग होने के बाद उन्होंने हथियार डालने का फैसला किया।

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