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नेपाल से लूटे हथियार बंगाल तक पहुंचे, चुनाव में बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

Published: Fri, 20 Mar 2026 06:49 PM (IST)

नेपाल में जनविरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकारी शस्त्रागार से लूटे गए अत्याधुनिक हथियार बंगाल पहुंच गए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

नेपाल से लूटे गए अत्याधुनिक हथियार बंगाल तक पहुंचे

नेपाल से लूटे गए अत्याधुनिक हथियार बंगाल तक पहुंचे

HighLights

  1. नेपाल से लूटे गए अत्याधुनिक हथियार बंगाल तक पहुंचे

  2. चुनावी माहौल में सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर खतरा

  3. पुलिस और एसटीएफ तस्करी नेटवर्क ध्वस्त करने में जुटी

राज्य ब्यूरो, कोलकात। नेपाल में पिछले वर्ष हुए जनविरोध प्रदर्शनों के दौरान सरकारी शस्त्रागार से लूटे गए अत्याधुनिक हथियारों के बंगाल तक पहुंचने की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार नाइन एमएम पिस्टल, कार्बाइन और एके-47 जैसे हथियार तस्करी के जरिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाए गए हैं, जो चुनावी माहौल में गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान कई थानों में लूटपाट और आगजनी हुई थी। इसके बाद ये हथियार बिहार के किशनगंज के तस्करों तक पहुंचे और वहां से उत्तर व दक्षिण बंगाल के आपराधिक नेटवर्क में फैल गए। बंगाल पुलिस और विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने हालिया छापेमारी में कुछ हथियार बरामद भी किए हैं, जिनमें नेपाल के शस्त्रागार में बने हथियार शामिल हैं।

एक महिला और दिव्यांग युवक के पास मिले हैं हथियार

ताजा कार्रवाई में एक महिला और एक दिव्यांग युवक को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से कार्बाइन और पिस्टल बरामद हुई। जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में मुंगेर और भागलपुर से बने हजारों अवैध हथियार राज्य में खपाए गए हैं।

पुलिस अब तक ढाई से तीन हजार हथियार जब्त कर चुकी है और सैकड़ों तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि इसे ‘हिमशैल का सिरा’ ही माना जा रहा है।

चुनावी माहौल में सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर खतरा

खुफिया अधिकारियों का कहना है कि कई आपराधिक गिरोह राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं, जिससे कार्रवाई में बाधा आती है। कुछ मामलों में वैध लाइसेंसी हथियार दिखाकर अवैध हथियारों के इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश भी की जाती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य पुलिस, एसटीएफ और सीआइडी के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो हथियारों की बरामदगी और तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है।

गया और जमालपुर पैसेंजर जैसी ट्रेनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, जिनका उपयोग तस्करी के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 1500 एजेंट इस अवैध कारोबार में सक्रिय हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी की योजना बनाई गई है।