कोलकाता निकाय चुनाव में 50 सीटों पर दावेदारी बनी NCPI की राह में रोड़ा, फंस गया पेच
कोलकाता नगर निगम चुनाव में एनसीपीआई 50 वार्डों पर उम्मीदवार उतारना चाहती है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा के साथ पेच फंसा है।

50 वार्डों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही एनसीपीआई। (फाइल फोटो।)
HighLights
एनसीपीआई कोलकाता निकाय चुनाव में 50 वार्ड चाहती है।
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व से सीटों के बंटवारे पर बातचीत जारी।
भाजपा राज्य इकाई के लिए दावेदारों को साधना चुनौती।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता नगर निगम चुनाव में 50 वार्डों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही एनसीपीआई की राह में सीटों के बंटवारे को लेकर पेच फंस गया है। तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए सांसद सुदीप बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ाई है।
हालांकि, सीटों के तालमेल पर चर्चा के बावजूद यह तय नहीं हुआ है कि एनसीपीआई के उम्मीदवार भाजपा के चुनाव चिह्न पर लड़ेंगे या भाजपा समर्थित गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरेंगे। नवंबर के अंत में प्रस्तावित निकाय चुनाव से पहले इस मुद्दे पर अंतिम सहमति बनना बाकी है।
50 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है पार्टी
एनसीपीआई सूत्रों के अनुसार, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत में उत्तर और दक्षिण कोलकाता में 20-20, यानी कुल 40 वार्डों पर उम्मीदवार उतारने का प्रस्ताव सकारात्मक स्थिति में पहुंचा है। इसके अलावा जादवपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच वार्डों और शहर के पांच अन्य वार्डों को लेकर भी चर्चा हुई है। इस तरह पार्टी कुल 50 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
एनसीपीआइ नेतृत्व ने कोलकाता नगर निगम चुनाव में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए केंद्रीय स्तर पर बातचीत शुरू की है। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तक भी संदेश पहुंचाया गया है। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद भी राज्य स्तर पर अंतिम फैसला आसान नहीं दिख रहा है।
भाजपा के सामने अपने दावेदारों को साधने की चुनौती
भाजपा के राज्य नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद नगर निगम चुनाव अकेले लड़ने की बात कही है। ऐसे में एनसीपीआइ को 50 वार्ड देने का प्रस्ताव लागू करना पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। वार्डों के परिसीमन के बाद कोलकाता में वार्डों की संख्या बढ़ी है, लेकिन भाजपा के भीतर भी उम्मीदवार बनने के दावेदारों की कमी नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, एनसीपीआई नेतृत्व को संकेत दिया गया है कि दिल्ली में बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद राज्य और कोलकाता के स्थानीय नेताओं की राय महत्वपूर्ण होगी। चुनाव में स्थानीय कार्यकर्ताओं का सहयोग और टिकट के दावेदारों की नाराजगी भी सीटों के तालमेल को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल भाजपा के चुनाव प्रभारी 209 सीटों पर अपनी पार्टी की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में एनसीपीआई के लिए 50 सीटें छोड़ने के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अनिश्चित बना हुआ है।
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