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‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न को लेकर नौशाद की याचिका खारिज, हाई कोर्ट बोला- मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं

Published: Wed, 30 Sep 2026 03:53 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी की 'लिफाफा' चुनाव चिह्न संबंधी याचिका खारिज कर दी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नौशाद को दिया झटका। (फाइल फोटो।)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नौशाद को दिया झटका। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. नौशाद सिद्दीकी की लिफाफा चुनाव चिह्न याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की।

  2. हाई कोर्ट ने मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार किया।

  3. ऋतब्रत तृणमूल को लिफाफा चुनाव चिह्न विवाद में बड़ी राहत मिली।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न को लेकर आईएसएफ के नेता नौशाद सिद्दीकी की याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने कहा कि अदालत मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। इससे फिलहाल ऋतब्रत तृणमूल खेमे को राहत मिली है।

नंदीग्राम और रेजीनगर में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में ‘लिफाफा’ चिन्ह ऋतब्रत तृणमूल को दिया है। आईएसएफ का कहना था कि यह चिह्न पहले से उसके पास रहा है। आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए नौशाद सिद्दीकी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनावई के दौरान आयोग के फैसले पर उठाया गया सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आयोग को निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी को मुक्त चिह्न नहीं दिया जाता तो विवाद की स्थिति नहीं बनती, लेकिन विधानसभा चुनाव में जिस चिह्न पर कोई दल चुनाव लड़ चुका है, वही चिह्न दूसरे दल को देने का औचित्य स्पष्ट होना चाहिए।

आयोग ने बताया नियमों का आधार

आयोग ने अदालत में कहा कि किसी राजनीतिक दल को एक ही मुक्त चुनाव चिह्न दो बार से अधिक नहीं दिया जा सकता। आयोग ने यह भी दलील दी कि चुनाव चिह्न किसी की संपत्ति नहीं है और जहां कानूनी अधिकार नहीं है, वहां उस पर दावा नहीं किया जा सकता। 28 सितंबर को मामले की सुनवाई पूरी हुई थी।

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