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अस्पतालों में भर्ती के लिए बनाए जा रहे फर्जी आधार कार्ड, मुर्शिदाबाद में 12,847 नाबालिग प्रसूताओं के मामले उजागर

Published: Sun, 01 Nov 2026 08:53 PM (IST)

मुर्शिदाबाद में बाल विवाह और नाबालिग मातृत्व से बचने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नाबालिग गर्भवती लड़कियों को अस्पतालों में भर्ती कराने के मामले सामने आए हैं।

अस्पतालों में भर्ती के लिए बनाए जा रहे फर्जी आधार कार्ड (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

अस्पतालों में भर्ती के लिए बनाए जा रहे फर्जी आधार कार्ड (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. नाबालिग गर्भवती लड़कियों के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल।

  2. बाल विवाह कानून से बचने को अस्पतालों में भर्ती।

  3. मुर्शिदाबाद में नाबालिग मातृत्व के सर्वाधिक मामले सामने आए।

जागरण संवाददाता, मुर्शिदाबाद। बंगाल में बाल विवाह और नाबालिग मातृत्व के खिलाफ सरकार की सख्ती से बचने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने के मामले सामने आए हैं। मुर्शिदाबाद जिले में कई परिवारों पर नाबालिग गर्भवती लड़कियों की उम्र बढ़ाकर दिखाने और फर्जी आधार कार्ड के जरिए निजी अस्पतालों तथा नर्सिंग होम में भर्ती कराने का आरोप है।

बहरमपुर के कई नर्सिंग होम में ऐसे मामले सामने आए हैं। पुलिस को आशंका है कि किसी संगठित माध्यम से फर्जी पहचान पत्र तैयार कराए जा रहे हैं। अस्पतालों की सतर्कता से ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, नाबालिग मातृत्व के मामलों में मुर्शिदाबाद पूरे बंगाल में पहले स्थान पर है। 2026 के पहले छह महीनों में राज्य में नाबालिग लड़कियों के करीब 60 हजार संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए। इनमें अकेले मुर्शिदाबाद के 12,847 मामले थे।

जिला पुलिस के अनुसार, हाल में कुछ दस्तावेजों की जांच में फातिमा खातून (बदला हुआ नाम) नामक नाबालिग का मामला सामने आया। उसके आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर 14 मार्च 2008 दर्ज की गई थी, ताकि उसे वयस्क बताया जा सके। जांच में पहचान पत्र फर्जी पाया गया।

निजी नर्सिंग होम और मेडिकल सेंटरों में मातृत्व देखभाल पाने एवं कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए ऐसे फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रघुनाथगंज, सूती और शमशेरगंज में भी इस तरह की शिकायतें मिली हैं।

पुलिस के मुताबिक, ऐसे आरोप सामने आए हैं कि एक खास गिरोह फर्जी आधार कार्ड बना रहा है, जिनका इस्तेमाल सरकारी एवं निजी अस्पतालों में नाबालिग गर्भवती लड़कियों के इलाज के लिए किया जाता है।

बहरमपुर के एक निजी नर्सिंग होम के चिकित्सक के मुताबिक, कई बार प्रसूता की उम्र और आधार कार्ड में दर्ज विवरण में अंतर देखकर संदेह होता है। ऐसे मामलों में पुलिस को सूचना दी जा रही है।

राज्य सरकार की सख्ती के बाद पुलिस ने बढ़ाई निगरानी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बाल विवाह और नाबालिग मातृत्व रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की घोषणा की है। 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के मां बनने पर उसके पति के खिलाफ पोक्सो के तहत कार्रवाई और स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने की बात कही गई है।

इसके बाद ही पुलिस ने सक्रियता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में मुर्शिदाबाद में पुलिस ने कई बाल विवाह रुकवाए हैं। जालंगी में 12 वर्ष की उम्र में विवाहित एक लड़की के 15 वर्ष की उम्र में गर्भवती होने का मामला सामने आया था। वहीं, शमशेरगंज में 16 वर्षीय लड़की की शादी की तैयारी पुलिस ने रुकवा दी थी। अब सरकारी अस्पतालों के साथ निजी चिकित्सा केंद्रों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।

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