कोलकाता, [राज्य ब्यूरो]। तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ चुके मुकुल रॉय ने चुनाव आयोग से मिलने के लिए समय मांगा है। वह शुक्रवार को दिल्ली मे मुख्य चुनाव आयोग कार्यालय जाएंगे। मुकुल ने गुरुवार को बातचीत मे यह जानकारी दी। हालांकि उन्होने नई पार्टी बनाने की योजना से इन्कार किया है।

मुकुल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस मे रहते हुए वह 1998 से चुनाव आयोग जाते रहे है। शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव कराने के बारे उनकी चुनाव आयोग से बात होती रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव और फिर 2011 मे राज्य के विधानसभा चुनाव मे राज्य मे जो राजनीतिक परिर्वतन हुआ वह शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव होने के कारण हुआ। चुनाव आयोग के लगातार संपर्क मे रहने के कारण उन्हे इसका अनुभव है।

मुकुल ने कहा कि अब वह तृणमूल मे नही है। फिलहाल किसी पार्टी के नेता नही है। लेकिन आम नागरिक और एक मतदाता की हैसियत से वह कल चुनाव आयोग जाएंगे। नवंबर मे पश्चिम बंगाल मे दो विधानसभा का उपचुनाव होना है। वह एक आम नागरिक की हैसियत से चुनाव आयोग से शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव कराने की व्यवस्था करने का अनुरोध करेगे।

भाजपा मे शामिल होने के सवाल पर उन्होने स्पष्ट कुछ नही कहा, लेकिन यह जरूर कहा कि उनकी नई पार्टी बनाने की कोई योजना नही है। हालांकि सूत्रो का कहना है कि दीपावली के बाद वह भाजपा मे शामिल होगे। तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष के उनपर सारधा, नारद स्टिंग कांड और अलकेमिस्ट घोटाले मे लिप्त होने के आरोप लगाने के सवाल पर मुकुल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति कुछ बोलने के लिए स्वतंत्र है। जहां तक उन्हे पता है कि सुप्रीम कोर्ट और कलकलाा हाईकोर्ट के निर्देश पर सारधा और नारद स्टिंग कांड के जांच चल रही है। मुकुल ने कहा कि इसकी जांच मे सीबीआइ और ईडी जब चाहेगी वह सहयोग करने के लिए तैयार है। मुकुल ने सफाई दी कि राजनीति मे रहते उन्होने कोई अनैतिक काम नही किया है।

उन्होने कहा कि वह राजनीति मे वंशवाद के खिलाफ है। जहां तक उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय के तृणमूल के विधायक होने की बात है तो वह अपनी योग्यता से है। किसी के अंदर राजनीति करने की योग्यता होगी तो उसे राजनीति मे आने से कोई रोक नही सकता है।

Posted By: Preeti jha

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप