ममता के आवास पर फीका रहा विजयादशमी का रंग, संगठन और चुनाव चिह्न की लड़ाई पर जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर विजयादशमी का पारंपरिक उत्साह इस बार नदारद रहा।

ममता के आवास पर विजयादशमी का उत्साह फीका रहा।
HighLights
ममता के कालीघाट आवास पर विजयादशमी का उत्साह फीका रहा।
पार्टी संगठन और चुनाव चिह्न विवाद पर कानूनी तैयारी प्राथमिकता।
कार्यकर्ताओं से मुलाकात, पर मिठाई और उत्सव से परहेज।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के पांच महीने बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर विजयादशमी का पारंपरिक उत्साह इस बार नदारद रहा। गुरुवार व शुक्रवार को नेता और कार्यकर्ता कालीघाट तो पहुंचे, लेकिन न तो परंपरागत विजयादशमी मिलन हुआ और न ही मिठाई बांटी गई।
नेताओं ने कार्यकर्ताओं से मुख्य रूप से संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की और सुनवाई के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाए। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर दावेदारी को लेकर 30 अक्टूबर को चुनाव आयोग में होने वाली सुनवाई से पहले पार्टी संगठन और कानूनी तैयारियां प्राथमिकता में रहीं। डोला सेन और कुणाल घोष समेत अन्य नेता आयोग में जमा किए जाने वाले हलफनामे की तैयारी में व्यस्त दिखे।
चुनाव के बाद श्रीरामपुर में अपनी पहली सभा में ममता बनर्जी ने कहा था कि तृणमूल हारी नहीं है। उन्होंने इस बार विजयादशमी नहीं मनाने की बात भी कही थी। गुरुवार को उसी के अनुरूप कालीघाट में शुभकामनाओं और पारंपरिक प्रणाम के बजाय संगठनात्मक चर्चा पर जोर रहा। बाद में अभिषेक बनर्जी भी पहुंचे, लेकिन गाड़ी से उतरकर सीधे घर के भीतर चले गए।
मौके पर मौजूद तृणमूल के एक पूर्व विधायक ने दावा किया कि चुनाव के बाद पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं और कई लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में उत्सव मनाना उचित नहीं है।
चोरबागान हादसे में हुई मौतों के मद्देनजर भी ममता बनर्जी ने उल्लास से दूर रहने की बात कही है। हालांकि, शनिवार और रविवार को वह अपने आवास पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों से मिलेंगी, लेकिन मिठाई बांटने और उत्सवी माहौल से परहेज किया जाएगा।
