ममता के सामने दोहरी चुनौती: एक तरफ विधायक हो रहे बागी, दूसरी तरफ भाजपा को सत्ता से हटाने की खाई कसम
बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला, कोलकाता में धरना प्रदर्शन किया। ...और पढ़ें

ममता के सामने TMC को बचाने की चुनौती। (पीटीआई)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहली बार बड़े सार्वजनिक मंच से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
कोलकाता के वाई चैनल में मंगलवार को आयोजित धरना मंच से उन्होंने कहा कि वह आखिरी सांस तक भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ती रहेंगी और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
मतदान के बाद हिंसा के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने धरना कार्यक्रम आयोजित किया था। धरने में पार्टी के अपेक्षित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं दिखी। धरनास्थल पर केवल छह विधायक और पांच सांसद ही नजर आए। ममता ने दावा किया कि भाजपा के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध कभी कटु नहीं रहे और अतीत में उन्होंने कई मौकों पर भाजपा नेताओं की मदद भी की थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं, लेकिन अब भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों से भटक गई है। शुभेंदु सरकार पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि भाजपा में अब पुराने कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि अन्य दलों से आए नेताओं की चल रही है।
तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार बनाया जा रहा निशाना
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। दिल्ली से तृणमूल को कमजोर करने और पार्टी में टूट कराने की साजिश रची जा रही है। पार्टी के विधायक, पार्षद और नेताओं को डराया-धमकाया जा रहा है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश हो रही है।
बंगाल में बुलडोजर राजनीति चल रही है और आम लोगों को भी डराया जा रहा है। ईडी और सीबीआइ जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर तृणमूल नेताओं को डराया जा रहा है। पार्टी के विधायकों और सांसदों को भाजपा का समर्थन करने के लिए दबाव में लाने की कोशिश हो रही है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बंगाल की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की।
अपने संबोधन में ममता ने विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कई सीटों पर मतगणना के दौरान धांधली हुई, जिसके कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। हालांकि, उन्होंने कहा कि तृणमूल लोकतांत्रिक तरीके से अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी।
माइक तक की नहीं मिली अनुमति
धरना कार्यक्रम को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा कि पहले रानी रासमणि एवेन्यू में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई और बाद में वाई चैनल में सीमित समय के लिए मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें माइक तक की अनुमति नहीं मिली और हैंड माइक के सहारे भाषण देना पड़ रहा है।
टीएमसी समर्थकों को धरना स्थल तक पहुंचने से रोका गया। हालांकि उन्होंने पुलिसकर्मियों को सीधे दोषी नहीं ठहराया और कहा कि प्रशासन अक्सर राजनीतिक निर्देशों के अनुसार काम करता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए यह आंदोलन कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक आंदोलनों में बाधा डाली गई तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से राज्यभर में महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित करने का भी आह्वान किया। तृणमूल विधायकों और नेताओं के पार्टी से दूरी बनाने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता ने कहा कि जो लोग पार्टी से विश्वासघात कर रहे हैं, उनके लिए भी वह सद्बुद्धि की कामना करती हैं।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए ममता ने कहा कि घटना गंभीर थी और यदि पत्थर सिर पर लगता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
