ममता तृणमूल ने ऋतब्रत बनर्जी गुट के खिलाफ खोला मोर्चा, पुलिस पर हलफनामा जुटाने के दबाव का लगाया आरोप
ममता तृणमूल खेमे ने पुलिस पर प्रतिद्वंद्वी ऋतब्रत बनर्जी गुट के पक्ष में जबरन हलफनामे जुटाने का आरोप लगाया है।
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ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप (फाइल फोटो)
HighLights
ममता तृणमूल ने पुलिस पर प्रतिद्वंद्वी गुट के लिए हलफनामे जुटाने का आरोप।
राज्यसभा सांसद डोला सेन ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजा।
चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी चिह्न और कोष पर विवाद जारी।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न और पार्टी की पहचान को लेकर जारी विवाद के बीच ममता बनर्जी खेमे ने पुलिस पर प्रतिद्वंद्वी ऋतब्रत बनर्जी गुट के पक्ष में जबरन हलफनामे जुटाने का आरोप लगाया है।
पार्टी की राज्यसभा सदस्य डोला सेन ने इस संबंध में राज्य के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कथित तौर पर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र की प्रति निर्वाचन आयोग को भी भेजी गई है।
तृणमूल के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और कोष पर अधिकार को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष विवाद चल रहा है। आयोग ने दोनों पक्षों से समर्थकों के हलफनामे और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने को कहा है। इसके लिए 26 अक्टूबर तक की समयसीमा निर्धारित है।
ममता टीएमसी की राज्यसभा सदस्य डोला सेन ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न थानों के अधिकारियों को ऋतब्रत बनर्जी और लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष अरूप राय के नेतृत्व वाले गुट के समर्थन में हलफनामे जुटाने का निर्देश दिया गया है। इसमें तृणमूल कांग्रेस के सदस्य नहीं रहने वाले लोगों से भी हस्ताक्षर कराने का दावा किया गया है।
हर थाने से 1100 से अधिक हलफनामे जुटाने का दावा
डोला सेन के मुताबिक, राज्य के सभी थानों के ओसी और आइसी पर 1100 से अधिक हलफनामे जुटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि राज्य के 607 थानों के हिसाब से इस प्रक्रिया के तहत छह लाख से अधिक हलफनामे जुटाए जा सकते हैं।
सेन ने पुलिस अधिकारियों से कथित तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हस्ताक्षर कराने की कोशिश रोकने और अधीनस्थ कर्मियों को भी ऐसी कार्रवाई से दूर रखने की मांग की है।
सेन ने स्टांप पेपर की आपूर्ति में भी अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लिखे पत्र में दावा किया कि स्टांप विक्रेताओं को प्रत्येक उप-पंजीयक कार्यालय में 10 रुपये मूल्य के करीब 25 हजार स्टांप पेपर उपलब्ध कराने और उन्हें संबंधित थाने के प्रभारी को सौंपने के मौखिक निर्देश दिए गए। जरूरत पड़ने पर 20 रुपये के स्टांप पेपर भी रजिस्टर में प्रविष्टि किए बिना उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है।
सेन का दावा है कि इससे स्टांप पेपर की कृत्रिम किल्लत पैदा हुई है और ममता खेमा के समर्थकों को हलफनामे तैयार कराने में परेशानी हो रही है।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी मदद लेने और आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने की बात कही है। राज्य पुलिस और सरकार की ओर से आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
