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सोनम वांगचुक के समर्थन में ममता बनर्जी, बंगाल विधानसभा में TMC विधायकों का प्रदर्शन

Published: Fri, 17 Jul 2026 11:29 PM (GMT+05:30)

ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने सोनम वांगचुक के अनशन के समर्थन में बंगाल विधानसभा परिसर में धरना दिया।

सोनम वांगचुक के समर्थन में ममता बनर्जी (फोटो-पीटीआई)

सोनम वांगचुक के समर्थन में ममता बनर्जी (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. तृणमूल विधायकों ने सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया।

  2. बंगाल विधानसभा परिसर में भीमराव आंबेडकर मूर्ति के पास धरना।

  3. नीट विवाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे लद्दाख के शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन के समर्थन में शुक्रवार को बंगाल विधानसभा परिसर में ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने धरना दिया।

विधानसभा परिसर में भीमराव आंबेडकर की मूर्ति के समक्ष आयोजित धरने में कुणाल घोष, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, अशोक देव व खलीफा अहमद समेत कई वरिष्ठ विधायक शामिल हुए।

ममता खेमे के विधायकों ने दिया धरना

तृणमूल विधायकों ने नीट विवाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। धरने के दौरान तृणमूल नेताओं ने बैनर और तख्तियां लेकर वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया।

विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सोनम वांगचुक लगातार अनशन पर हैं और उनकी सेहत बिगड़ रही है। ममता बनर्जी ने वांगचुक से बात कर उनके आंदोलन को समर्थन दिया है।

घोष ने कहा कि ममता बनर्जी के निर्देश पर पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही सोनम वांगचुक से दिल्ली में धरना स्थल पर मिल चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे, चिकित्सकों की टीम भेजे और वांगचुक की मांगों पर गंभीरता से विचार करे।

वहीं, वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि बंगाल विधानसभा देश के कई महत्वपूर्ण आंदोलनों की गवाह रही है और सोनम वांगचुक का आंदोलन भी एक वास्तविक जन आंदोलन है।

शोभनदेव चट्टोपाध्याय का कहना था कि वांगचुक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और उनकी मांगों पर केंद्र सरकार को सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

तृणमूल विधायक ने कहा कि सोनम वांगचुक किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से अनशन पर होने के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर होगी।

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